cg24 आजतक न्यूज-राजनांदगांव से के एस ठाकुर
प्रदेश के शासकीय सेवकों में सबसे कठिन ड्यूटी किसी विभाग के कर्मचारी को होती है तो वह पुलिस विभाग के आरक्षक की होती है ।ना तो इन्हें ड्यूटी के अनुरूप पर्याप्त वेतन मिलता है ,ना ही किसी प्रकार की छुट्टी का लाभ ले पाते हैं ।और तो और इन्हें अपने परिवार में होने वाले दुख और सुख में भी शामिल होने के लिए अनेक बार छुट्टियां नहीं मिल पाती है ,जिसके कारण वे परिवार के इस महत्वपूर्ण कार्यों में भी सम्मिलित नहीं हो पाते हैं ।रात दिन की ड्यूटी और अनेक बार समय पर छुट्टियां ना मिलने तथा अन्य परेशानी की वजह से पुलिसकर्मी अनेक बार अवसद पर आ जाते हैं औरआत्महत्या जैसे जैसे घटनाओं को अंजाम भी दे देते हैं । पुलिस कर्मियों की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, जब सारा देश होली दिवाली दुर्गा उत्सव जैसे त्यौहार में अपने परिवार के साथ मग्न रहता है, वहां पर यह अपने परिवार से दूर आमजन की सुरक्षा में लगे होते हैं। इसी प्रकार के अन्य अनेक परेशानी और समस्या को लेकर वर्ष 2018 में प्रदेश के इतिहास में पहली बार पुलिस ने एकता और साहस का परिचय दिया था, तथा अपनी कुछ मांगों को लेकर सामूहिक रूप से परिवार के सदस्य सहित सरकार को ज्ञापन सौंपने राजधानी जाने का निर्णय भी ले लिया थ। यह एक अलग बात है कि शासन और प्रशासन और सरकार ने बलपूर्वक पुलिस एवं उनके परिवार पर दबाव डालकर उनके इस हड़ताल को सफल होने नहीं दिया ।तात्कालिक भाजपा सरकार में उन्हें उनकी कुछ मांगों को पूरा करने का आश्वासन भी दिया गया था । वर्तमान कांग्रेस सरकार ने 2018 के विधानसभा चुनाव के दरमियान अपने चुनावी सभा में पुलिस की मांगों का समर्थन किया था और सत्ता में आने पर उन्हें उनकी मांगों को पूरा करने का भरोसा भी दिलाया था ।पुलिस ने जो मांग की थी उसमें प्रमुख रूप से यह था कि उनकी वेतन विसंगति दूर कर वेतन में बढ़ोतरी की जाए, साप्ताहिक अवकाश दिया जाए ,एवं क्षेत्र भत्ता बढ़ाई जाए हालांकि सरकार ने साप्ताहिक अवकाश देने के आदेश तो जारी किए हैं ,लेकिन अपवाद स्वरूप इस आदेश का पूरी तरह से पालन शायद ही प्रदेश किसी थाने में हो रहा होगा यह एक बहुत बड़ी विडंबना भी है ।आज भी पुलिस कर्मी साप्ताहिक अवकाश के लिए तरस रहे है ।कठिन एवं 24 घंटे की ड्यूटी के कारण अपने बच्चे अपने परिवार अपने बूढ़े मां बाप को सप्ताह में एक दिन का पर्याप्त समय भी नहीं दे पाते है। मानसिक एवं स्वास्थ्य की दृश्य अन्य कर्मियों की तरह पुलिसकर्मी को भी 1 दिन का साप्ताहिक अवकाश दिया जाना निहायत एवं नितांत जरूरी है। पुलिसकर्मियों से से ड्यूटी तो रात दिन लिए जाते हैं लेकिन उनको मिलने वाली सुविधाएं और लाभ की बात आती है तो अधिकारी एवं विभाग अपना मुंह फेर लेते हैं अपने हाथ खड़े कर देते हैं और तो और वह अपने किसी बात को लेकर अपनी परेशानी को लेकर आवेदन करते हैं तो अनेक बार उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से दंडित भी होना पड़ता है ।ऐसा ही एक वाक्य गुजरा है धमतरी जिले के धमतरी रक्षित लाइन में पदस्थ आरक्षक उज्जवल दीवान के साथ इस समय पूरा प्रदेश कोरोना की महामारी की चपेट में है और विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी शासन ने प्रदेश के सभी कर्मचारियों से एक दिन का वेतन स्वैच्छिक रूप से इस महामारी के रोकथाम में सहायता एवं सहयोग स्वरुप देने का एक आदेश जारी किया था स्वेच्छा पूर्वक का तात्पर्य होता है कि यदि आप देना चाहे तो ,हालांकि प्रदेश के सभी कर्मचारियों के एक दिन का वेतन कटा है ,लेकिन दबे जुबान से पुलिस विभाग और स्वास्थ विभाग तथा सफाई कर्मियों की ओर से सुनने को मिला कि क्योंकि हम रात दिन करोना काल में अपनी सेवाएं दे रही इसलिए हमारा वेतन नहीं काटा जाना चाहिए था । इस पर सामने आकर किसी ने ना तो अपनी बात कही ना ही किसी ने आवेदन देने का साहस जुटाया । किंतु धमतरी जिला के धमतरी के रक्षित लाइन में पदस्थ आरक्षक उज्जवल दीवान नेअपने जिले के एसपी साहब को 24 अप्रैल 2021 को आवेदन दिया दिया कि मैं पिछले साल एक दिन तक वेतन कटवाया था ।अतः इस वर्ष पुनः मेरे वेतन से एक दिन का वेतन ना काटा जाए ।आरक्षक उज्जवल दीवान को यह आवेदन देना महंगा पड़ गया और इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा । एसपी साहब ने आरक्षक उज्जवल दीवान का दिनांक 26, 4 ,2001 को स्थानांतरण प्रशासनिक आदेश के तहत जिले के सबसे वनांचल क्षेत्र मेचका थाने में कर दिया । यहां पर केवल स्थानांतरण करना ही बहुत कुछ नहीं था बल्कि उसी दिन दोपहर 12:20 बजे उसे एक तरफा भार मुक्त कर दिया गया जबकि तब तक उसे आदेश भी नहीं मिला था। उज्जवल दीवान इस कार्यवाही से अचंभित था । वह इस आदेश के संबंध में एस पी महोदय को आवेदन देने एस पी कार्यालय के 2 दिन चक्कर लगाया जहां पर उसका आवेदन भी नहीं लिया गया ।अपनी हक के लिए आवेदन देने की उसे इतनी बड़ी सजा मिली ।वह इतना छुब्ध एवं दुखी हो गया कि उन्होंने 28 तारीख को अपना इस्तीफा एस पी कार्यालय में जाकर के दे दिया। दूरभाष पर चर्चा मे आरक्षक Ujjwal दीवान ने कहा है कि अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।चूकि मुझे वहां से रवानगी दे दी गई थी इसलिए मैं जहां स्थानांतरण स्थान किया गया था वहां आकर ज्वाइन कर लिया हूं । उनका यह भी कहना है कि यदि इस्तीफा स्वीकार किया जाता है तो ठीक है लेकिन पुनः मेरे को इसी प्रकार की अगर मानसिक पीड़ा दी जाती है तो मैं यह नौकरी छोड़ दूंगा । आरक्षक दीवान ने बताया कि उन्हें इस माह का वेतन भी नहीं दिया गया है और मुझे बार-बार शो काज नोटिस देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है । आरक्षक उज्जवल दीवान ने व्यथित होकर अपने अधिकारियों पर प्रमाण सहित गंभीर आरोप लगाएं । क्या आरक्षक दीवान को न्याय मिल पाएगा या विभाग के अधिकारियों के प्रति यथार्थ को कहने तथा एक छोटे से आवेदन देने के बदले अब इसी प्रकार की प्रताड़ना भोकता रहेगा ।
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