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रेत के खेल में सबके चेहरे उजागर,डरपोक प्रशासन से कार्यवाही की उम्मीद नही- मोहन मंडावी

आदिवासी समाज व ग्रामीण की सक्रियता से डरे रेत माफिया

कांकेर :- प्रदेश के आठ-नौ हजार रूपये मे एक हाईवा, 2500 रूपये में एक ट्रेक्टर रेत मिलने की दावा करने वाली भूषेश बघेल की सरकार खोखला निकला। रेत अब 18 से 20 हजार रूपये मे बिकने लगा है।

कलेक्टर से लेकर मत्री, विधायक सभी जनशिकायतो की अनदेखी कर रहे हैं। महानदी की छाती मे सरेआम चैनमाउटिंग एव जेसीबी से रेत का दोहन किया जा रहा है। लेकिन कार्यवाही करना तो दूर पर्यावरण कानूनों की धज्जियां उड़ाने बालों पर किसी तरह से काई कार्यवाही नहीं हुई तब अपनी जल जमीन और जंगल की संपत्ति को नियंत्रित एवं सुरक्षित रखने वाले आदिवासी समाज अब उग्र हो चुके है तथा अब कभी भी स्थिति गंभीर हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उत्तर बस्तर कांकेर के भाजपा सांसद मोहन मंडावी ने कहा कि पूरे प्रदेश में रत के नाम पर नंगा नाच हो रहा है। रायपुर, दुर्ग, धमतरी सहित सभो शहरों एवं सडकों में, खेतों मे करोड़ों रूपये का रेत डंप कर रखा गया है। केवल कांकेर में ही लखनपूरी एवं आस पास के क्षेत्रों में डेढ़ से दो लाख वर्गफुट में जगह जगह रेत डंप कर रखा गया है जिससे बरसात में दुगुने तिगुने कीमत पर बिक्री कर सके।

सांसद मंडावी ने कहा कि रेत डंप कर पिछल साल दुर्ग, रायपुर सहित बड़े शहरों में 24 हजार रूपये प्रति हाईवा बेचने की शिकायत मिली थी, तब कई सरकारी निर्माण कार्य यहां तक कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत एक लाख मकान बनान की योजना को ही निरस्त कर दिया। अपने को गरीबों का मसीहा कहने वाली सरकार से किसी तरह की कार्यवाही की आशा करना ही बेकार है।

लखनपुरी क्षेत्र के आस पास के गांव वाले धीरे धीरे एकत्रित होकर आंदोलन को तेज करने की तैयारी कर रहे हैं। इनकी प्रमुख मांग डंप पड़े रेत को राजसात कर नियंत्रित मूल्य में बिक्री करने, पर्यावरण कानून के अंतर्गत ठेकेदार द्वारा नदी से कटाब रोकने के लिए 1500 फलदार वृक्षों को लगाने, आसपास के स्कूल एवं सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने एवं, ग्रामीणों को सड़क एवं पेयजल सुविधा प्रदान करने का प्रावधान है, लेकिन प्रशासन की चुप्पी के कारण रेत माफिया केवल कमाई करने में लगे है। रेत माफिया मौन कौन है और उन्हें किस किस का संरक्षण है यह जग जाहिर हो चुका है।

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