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गणेश जी की जन्मकथा का वर्णन किया आज साध्वी सरस्वती जी ने,पाटेश्वर धाम में हो रहा कथावाचन

Cg24आजतक न्यूज

डौंडीलोहारा :- जामडी पाटेश्वर धाम के श्री हनुमान नन्दी शाला गौ अभ्यारण्य में यज्ञ अनुष्ठान के चौथे दिवस दिन भर रिमझिम बारिश के बावजूद भक्ति मय माहौल रहा । रिमझिम बारिश के बावजूद भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आया बल्कि चलते फिरते नाचते गाते आनंदित हो रहे थे। दोपहर 2 बजे कथा व्यास साध्वी सरस्वती ने शिव कथा के दौरान भगवान गणेश जी की जन्म का कथा बताते हुए कहा कि माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से कहा कि आपके साथ विवाह होकर आयी तो मैं अपने साथ कुछ भी नहीं लाई हूँ। यहाँ तो आपके गण ही दिखाई देते हैं। मैं पुरुषों के साथ कैसे रह सकती हूं। मेरे मायके हिमांचल नगर से सखियाँ बुला दें। हिमांचल से सखियां आयी तो वे सखियाँ मायके पक्ष की थी तो ससुराल वालों के खिलाफ भड़का दिया । शिव जी के निजी गण है वे उन्हीं के बात को मानेंगे आपके बात मानने के लिए आपका भी निजी गण होना चाहिए। माता पार्वती ने सोचा सखियाँ सही कह रही है। माता पार्वती ने एकांत में स्नान कर रही थी अपने शरीर के मिट्टी को जमीन में पटक कर एक गण का निर्माण किया । वह और कोई नहीं बल्कि भगवान गणेश जी थे। कैलाश पर्वत के मुख्य द्वार में गणेश जी पहरा देना शुरू किया। माता पार्वती सयन करने चली गई । गणेश जी दरवाजे में पहरेदारी करने लगे भगवान शिव प्रवेश द्वार में आये तो भगवान भोलेनाथ को गणेश जी ने रोक दिया। भगवान शिव क्रोधित होकर अपना त्रिशूल निकाल कर गणेश जी के सिर को काट दिया। चिल्लाने की आवाज सुनकर माता पार्वती दौड़ी-दौड़ी गणेश जी के पास आई और अपने शरीर से उत्पन्न गणेश जी की हाल देखकर अत्यंत क्रोधित हो गई माता पार्वती की क्रोध से धरती कांपने लगी देवता गण व शिव जी माता पार्वती से क्रोध शांत करने के लिए प्रार्थना की । घंटों मिन्नतें करने के बाद माताजी रोने लगी आंख से अश्रु धारा बहने लगा तब भगवान भोलेनाथ से कहा मेरे शरीर से उत्पन्न यह पुत्र जीवित होगा तभी मैं सौम्य रूप धारण करूंगी तब भगवान भोलेनाथ ने अपने गणों को आदेश दिया कि जाओ कोई भी रास्ते मे पहले दिखे उसका सिर काटकर ले आना ।सर्वप्रथम शिव गणों को गजराज दिखा गजराज की सिर को धड़ से अलग कर भगवान भोलेनाथ के सामने ले आये। हाथी के सिर को देखकर सभी अचंभित हो गये लेकिन जैसे ही गणेश जी के धड़ में गजराज का सिर रखा गया तो गणेश जी सुंदर बालक रूप में जीवित हो गये। देवता फूलों की वर्षा करने लगे माता पार्वती सौम्य स्वरूप धारण करके देवताओं और भक्तों को आनंदित किया। संत श्रीराम बालक दास महात्यागी ने कहा कि बाबा महाकाल की असीम कृपा हुई है सुख समृद्धि के लिए धरती की प्यास बुझाने वाली रिमझिम बारिश हो रही है। जिससे किसानो की फसल की अच्छी पैदावारी होगी। संध्या बेला में गौमाता व महाकाल की अर्ध नारिश्वर रूप का भस्म अभिषेक व आरती किया गया। ढोल , नगाड़ों, घंटी घड़ियाल की धुन में लोग झूमने लगे थे।

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