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गोबर के दिए से बाजार सजने लगी ,,एवं गांव गांव में महिला स्व सहायता समूह गोबर के दिए जलाकर मनाएंगे दीपावली

गुंडरदेहीcg24आजतक

गोबर के रंग बिरंगे दिए से दिवाली में घर आंगन होंगे रोशन,, अब मिट्टी के मिट्टी के दिए के बजाय महिला समूह गोबर का दिए बनाकर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही है।

दीपावली पर्व नजदीक आते ही अब गोबर के दीए की मांग की बढ़ने लगी है। गुंडरदेही क्षेत्र में स्व सहायता समूह की महिलाएं इन दिनों गोबर से बने दीयों में रंग रोगन का कार्य कर रही है। गुंडरदेही ब्लॉक मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर ग्राम मासुल के साक्षी स्व सहायता समूह की महिलाएं लगातार द्वितीय वर्ष गोबर के दीए बनाकर स्वयं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। महिलाएं इसकी सहायता से न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि एक बेहतर जीवन भी जी रही हैं। महिलाओं के इस कार्य में अब उनका परिवार भी साथ दे रहा है।

साक्षी स्व सहायता समूह में कुल 13 महिलाएं हैं जो पिछले 2 वर्ष से गोबर के दीए का निर्माण कर रही है। इस कार्य समूह के अध्यक्ष दिव्या साहू, सचिव लीना साहू, सक्रिय महिला रूपमती साहू एवं सदस्य विमला बाई साहू, खेमिन बाई, मोक्ष बाई साहू, भेमिन बाई साहू, मालती बाई, हीना बाई, डिलेश्वरी साहू, गंगाबाई, लताबाई एवं बुधयारीन बाई इसके अलावा विभिन्न गांव में भ्रमण पर दीया बेचने वाले योगेश्वर कुमार साहू का विशेष योगदान है।

पांच हजार दिए का लक्ष्य

महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष लगभग 5 हजार दीए बनाने का लक्ष्य है। जिसमें से 4 हजार दीए बन गए हैं जल्द ही एक हजार दीए का निर्माण भी किया जाएगा। महिलाओं ने बताया कि गोबर के दीए के साथ-साथ हवन कुंड, स्वस्तिक, शुभ लाभ एवं करवा चौथ के लिए उपयोग किए जाने वाले कैंडल भी बनाए हैं जिसकी कीमत 2 रुपए से लेकर 10 रुपए तक है।

दुर्ग, धमतरी व राजनांदगांव से दीए बनाने के मिले आर्डर

समूह की महिलाओं ने बताया कि दिए का आकार एवं सुंदरता को देखकर बालोद जिले के अलावा अन्य दुर्ग, धमतरी व राजनांदगांव जिले से दीए बनाने का ऑर्डर मिल रहा हैं। इस वर्ष लगभग अन्य जिलों में 500 दिए बेच चुके हैं। अभी भी दिए बनाने का ऑर्डर आ रहा है।

समय के अभाव के चलते ऑर्डर नहीं ले रहे: महिलाएँ

समूह की सक्रिय महिला रूपमती साहू ने बताया कि इस वर्ष लगभग 8 हजार दीए का ऑर्डर आया है। लेकिन समय के अभाव के कारण एवं समूह की महिलाएं कृषि कार्य में व्यस्त होने के कारण दीए बनाने में रुचि नहीं ले रही है जिसके चलते इस वर्ष सिर्फ 5 हजार दीए बनाने का लक्ष्य है।

13 हजार दीए बेचे थे बीते वर्ष

स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि लगातार द्वितीय वर्ष गोबर के दीए बना रहे हैं। परंतु पिछले साल की तुलना में इस वर्ष दीए बनाने का ऑर्डर कम आया है। बीते वर्ष लगभग 13 हजार गोबर के दीए बनाने का आर्डर मिला था। जिससे महिलाओं को अच्छी आमदनी मिली थी।

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