

प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता
लगभग 2 दिन पहले महासमुंद जिले से उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद तक रोजी-रोटी की तलाश में दलाल के चंगुल में फंसकर पलायन करने वाले 130 मजदूरों को पटेवा पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद अब फिर से एक जत्था कसहीबाहरा में पलायन करने की फिराक में वाहन का इंतजार करते देखा जा रहा है। हम आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से हर साल हजारों की संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों में रोजी-रोटी की तलाश के लिए चले जाते हैं इसके लिए पहले इलाके में मजदूर दलाल सक्रिय हो जाते हैं और इन दलालों द्वारा एडवांस में मजदूरों को रकम देकर उनका पलायन कराया जाता है। हम आपको बता दें कि महासमुंद जिले से मजदूरों का पलायन अक्सर उत्तर प्रदेश जम्मू कश्मीर और तमिलनाडु जैसे इलाकों में होता है जहां ईट भट्ठा में मजदूरों को ले जाकर उन से काम लिया जाता है और लंबे समय तक ऐसे मजदूर वहां शोषित होते हैं। मजदूरों का पलायन रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस इंतजाम बात नहीं किए जा पा रहे हैं हालांकि सोशल मीडिया में सूचना के बाद विगत दिनों पटवा पुलिस ने 130 मजदूरों को इलाहाबाद ले जाते हुए रोकने में कामयाब हो गई थी। भरौल महासमुंद जिले में मजदूरों को दूसरे प्रांतों में जाने से रोकने के लिए रोजगार के अवसर देने तथा रोजगार मूलक कार्यों को प्राथमिकता के साथ शुरू किया जाने की आवश्यकता भी देखी जा रही है।
महासमुंद से ब्यूरो चीफ जीत तिवारी की रिपोर्ट
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