डोण्डी- महिलाएं भारत की जनसंख्या का क़रीब आधा हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षाकृत देश की आर्थिक संपन्नता का कम लाभ मिला है। अधिकांश महिलाओं के अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत होने के कारण उन पर महामारी का प्रभाव ज्यादा देखने को मिला। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी है। देश भर से ऐसी कई मजबूत औरतों की कहानियां सामने आईं, जिन्होंने अपने घरों से बाहर निकालकर साहस और हिम्मत दिखाते हुए अपने समुदाय की सहायता की। उन्होंने अपनी लगन से महामारी के अनुभव को एक सकारात्मक अनुभव में परिवर्तित करते हुए, बदलती हुई दुनिया के अनुसार अपने कौशल क्षमता में विस्तार किया। ये कहानियां दूसरों को आगे बढ़ने के लिए उम्मीद और प्रोत्साहन देती हैं डोण्डी अनुविभागीय अधिकारी के रूप में सेवा दे रहि श्रीमति प्रेमलता चंदेल व आदिवासी ब्लॉक में तहसीलदार के पद पर सेवा दे रही नेहा धुर्व भी उन लाखों महिलाओं में से एक हैं, उन्होंने एक ऐसे कार्यदल की तरह काम किया, जो परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम होने के साथ-साथ नेतृत्वकर्ता के रूप में काम के लिए आगे आयीं।
अनुविभगिय अधिकारी प्रेमलता चंदेल ने कहा कि नारी सशक्तिकरण नारी में अपरिमित शक्ति और क्षमताएं विद्यमान है। उन्होंने कहा कि आज नारी अपने साहस के बल पर पूरे आत्म विश्वास के साथ हर क्षेत्र में कामयाबी का परचम लहरा रही है। नई सदी की नारी के पास कामयाबी के उच्चतम शिखर को छूने की अपार क्षमता है।
तहसीलदार नेहा धुर्व ने कहा कि समाज के दो पंख है एक स्त्री व दूसरा पुरुष यह दोनों पंख समान होंगे तभी समाज, देश व राष्ट्र का विकास होगा। दृढ इच्छा शक्ति एवं शिक्षा ने नारी मन को उच्च आकांक्षाएं सपनों के सप्तरंग एवं अंतर्मन की परतों को खोलने की नई राह दी है। जहां नारी का सम्मान होता है वहां देवता निवास करते है। हर क्षेत्र में महिलाएं पुरूषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। संस्कारों की जन्मदात्री नारी शक्ति ही है।
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