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जीव का कल्याण सतगुरु की शरण में जाने से होगा :- महात्मा सुजाता बाई जी

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“तेरा सत चित आनंद रूप कोई कोई जाने रे” सु मधुर भजनों से महात्मा शैला बाई जी ने लोगों को आनंदित किया ।

प्रत्येक प्राणी को जीवन देने वाली शक्ति है वह प्राण शक्ति है, जो प्रत्येक शरीर धारी जीवात्मा को सांसों के माध्यम से ही प्राप्त होती रहती है ,वायु के माध्यम से हर प्राणी श्वास लेता है और इन सांसों में वह स्पंदन या आदि नाम की ध्वनि मौजूद रहती है ,और यही शब्द रूपी हंस प्राणों में मौजूद रहकर शरीर को जीवित रखता है ,आखिर इन प्राणों का उद्गम कहां से है ,इस प्राणों के रहस्य को समझने के लिए सद्गुरु की आवश्यकता पड़ती है! यह ज्ञान अगर मानव प्राप्त करना चाहता है तो उसे तत्वदर्शी महापुरुष की खोज करनी पड़ेगी, क्योंकि समय के महापुरुष की कृपा के बिना इस ज्ञान को पाना असंभव है । सबसे पहले हमें ऐसे संत की खोज करनी होगी जिसकी पहुंच परमात्मा तक है। यदि हमें भी परमात्मा की तलाश करनी है तो हमें भी स्वामी विवेकानंद जैसा जिज्ञासु बनना पड़ेगा, और स्वामी रामकृष्ण परमहंस जैसे सतगुरु की शरण में जाना होगा ,तभी हम परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं ।
उपरोक्त विचार सदगुरुदेव *श्री सतपाल जी महाराज* के आत्मा अनुभवी शिष्य सुजाता बाई जी ने सद्भावना सत्संग समारोह के मंच से कहीं।
महात्मा *भुवनेश्वरी बाई जी* ने कहा – कि आज का मानव अपनी खोज अगर करना चाहे तो यह करोड़ों जन्मों का रास्ता है , कि मैं कौन हूं , पर समय के तत्व ज्ञानी सद्गुरु की कृपा से वह दुर्लभ और असंभव ज्ञान जिसका वर्णन वेद शास्त्र ,पुराण ,गीता एवं रामायण आदि धर्म ग्रंथों में किया गया है ,वह सुलभ हो सकता है।
महात्मा *महादेवी बाई* जी ने कहा- कि भगवान के करोड़ों गुणवाचक नाम है, किंतु प्रभु का वास्तविक अविनाशी नाम हर प्राणी के सांसो में समाया है ,इसे मानव शरीर में रहते हुए ही संतों के सानिध्य में जाकर जाना जा सकता है।


कार्यक्रम को सफल बनाने में मानव उत्थान सेवा समिति के जिला प्रधान -रोहित नायक ,जिला सचिव -कृष्ण कुमार साहू, आर.सी.सिंघल तहसील सचिव- शिवकुमार चौरके ,रंजन निषाद, संतोष कुमार साहू ,कृष्ण कुमार देवांगन ,शाखा प्रधान विजय कुमार पटेल, राकेश पटेल, नाथूराम कुल्हरिया ,डामन लाल ठाकुर ,राधेलाल बढ़ाई ,केजू राम भूआर्य ,सुकालूराम ठाकुर, सुखीत लाल ठाकुर ,सुखुराम कोसमा ,भरत लाल डरसेना, माहेश्वरी गांवरे ,एवं यूथ विंग एवं मानव सेवा दल के स्वयंसेवकों का सहयोग रहा।

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