google.com, pub-8616032207403459, DIRECT, f08c47fec0942fa0

“डौंडीलोहारा विधानसभा” नेतृत्व विहीन क्षेत्र ? गांव,नगर के विकास के लिए राजनीतिक शून्यता

 व्यवहार न्यायालय के विषय पर किसी ने जुबान नहीं खोला 

डौंडीलोहारा :- बालोद जिले का सबसे बड़ा व आदिवासी सुरक्षित सीट डौंडीलोहारा जिसकी कभी राजनीतिक चर्चाओं में अविभाजित मध्यप्रदेश के साथ साथ दिल्ली तक इस विधानसभा की चर्चा होती थी लेकिन आज अगर देखे तो वर्तमान समय में यह क्षेत्र “नेतृत्व विहीन दिखाई दे रहा है।

 पूर्व समय कि बात करे जो अब इतिहास बन गया है। में इस सीट से कद्दावर आदिवासी नेता स्व .झुमुकलाल भेड़िया लगातार चुनाव जीत कर मंत्री रहे जिनकी धमक दिल्ली की राजनीति तक बनी रही उनके समय तक डौंडीलोहारा का नाम सुर्खियों में रहते आया था लेकिन वर्तमान में इस सीट पर जनता की आवाज को ताकत देने वाला एक भी दमदार नेता ढूंढने में भी दिखाई नहीं दे रहा । हम यह इसलिए कह रहे हैं कि क्षेत्र में कई ऐसे ज्वलंत मुद्दे व समस्या है जिसका न तो हल हो रहा न ही मांगो को लेकर आवाज बुलंद हो रहा । भगवान भरोसे यानी कि सरकार के दिशा निर्देशों के तहत मिल रहे विकास कार्य या नियमत: जो विभाग के द्वारा स्वीकृत हो रहे इसी माध्यम से कार्य हो रहे जो पर्याप्त नहीं है। 

आज इस विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक शून्यता तो दिख ही रहा वहीं नगर के अंदर व ग्रामीण क्षेत्रों के जन आवाज को सुनने वाला कोई बड़े दमदार नेता की कमी का अहसास हो रहा है। 

 वर्तमान राजनीतिक स्थिति के साथ साथ हम अगर 90 के दशक की बात करे तो इस नगर में स्व. राधेश्याम शर्मा की तूती बोलती थी जो सत्ता व संगठन के एक मात्र बड़े दमदार नेता थे। वो नगर हित के लिए जो कह देते वो फाइनल हो जाता था सरकार के मंत्री हो या सांसद सभी उनकी बातों का मान रखते थे। वहीं स्व.चंपालाल भंसाली, दमदार नेता स्व.जगदेव सिंह ठाकुर जैसे जमीनी नेतृत्व डौंडीलोहारा को मिला हुआ था जिन्होंने नगर को सहेजा व संवारा वही वर्तमान में देखे तो आज एक भी ऐसा नेता नहीं दिख रहा जिनको जनता का साथ मिला हो ऐसा दिखाई दे। जिनकी बातों में दमदारी दिखे नगर हित की बात में आगे दिखाई दे।

ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि आज नगर के अंदर तहसील कार्यालय व sdm ऑफिस में व्यव्हार न्यायालय भी स्थापित हुई थी। लेकिन अब न्यायालय के नए भवन के लिए नगर से 2 किलोमीटर दूर संबलपुर गांव में जमीन तय कर दिया गया वही मीडिया में इसके लिए बकायदा दावा आपत्ति भी मंगवाया गया।

 लेकिन बड़ी बात यह हैं कि डौंडीलोहारा के विकास की बड़ी बड़ी बातें कहने वाले किसी भी दल के नेता,विधायक,सांसद,या नगर पंचायत के जिम्मेदारों ने इस पर एक बार भी विचार करने सामने आए हो या नगर से बाहर निर्माण के लिए आपत्ति करने में सामने दिखाई दिए हो।

न्यायालय नगर में बने या संबलपुर गांव में प्रशासन या न्यायालय के जिम्मेदार जो भी उचित निर्णय ले लेकिन गौर करने की बात यह है कि वर्षों से स्थापित न्यायालय को बाहर ले जाने का काम चालू हो गया बावजूद किसी के मुंह से एक आवाज तक नहीं निकला 

 तो हमने जो पूर्व में कहा कि विधानसभा नेतृत्व विहीन हो गया है। तो इस बात को बल मिलता है। की नगर विकास के लिए अब 90 के दशक में जो नेताओं में दमदारी व सोच था आज वर्तमान के नेताओं में सिर्फ पेपरबाजी,फोटो सेशन व दिखावे की राजनीति ही नजर आ रहा है। 

कांग्रेस को देखे तो वो विपक्ष में रहने की बात कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं। वहीं सत्ता पक्ष के पास पोस्टर नेताओं की कमी नहीं है। लेकिन जायज विषयों पर बोलने की ताकत किसी भी नेता में दिखाई नहीं दे रहा है। 

नए न्यायालय भवन निर्माण को नगर के बाहर ले जाने को लेकर नगर के कुछ युवा व्यापारी भी असहमत दिखाई देते हैं। 

व्यापार के लिए सही नहीं मानते हैं लेकिन वो इस बात से भी सहमत दिखाई देते हैं कि डौंडीलोहारा नगर में अब कोई भी दमदार नेता नहीं जो नगर हित में सामने आए। 

आज के समय में सत्ता की मलाई तो सब खाना पसंद करते हैं। लेकिन जन सरोकार से ऐसे नेताओं को कोई मतलब नहीं 

अब जनता करे तो क्या करे दो दलीय राजनीतिक नेताओं व पार्टियों के चुनावी वजूद के कारण वो भी अपनी राय इन्हीं व मत इन्हीं नेताओं को थमा दे रहा है। 

लेकिन जब बात वजूद,विकास व दमदारी की हो तो जनता के हाथ मौन व्रत वाले नेताओं के कारण खाली ही रह जाते हैं। 

जो व्यवहार न्यायालय के मामले में नगरवासियों को वर्तमान के नेताओं की चुप्पी से देखने को मिल रहा है। सत्ता तो भाजपा की है लेकिन सत्ता में क्षेत्र के नेताओं की कितनी चल रही यह तो समझा ही जा सकता है। 

 डौंडीलोहारा की दुर्दशा को देखकर ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *