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बोर्ड परीक्षा परिणाम में गिरावट के लिए सिर्फ प्राचार्य दोषी ? जिम्मेदार अन्य शिक्षकों पर मेहरबानी से उठते सवाल

बालोद CG 24 आजतक खबर
बालोद – जिले में वर्ष 2025-26 की 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम में गिरावट को जिला कलेक्टर की भारी नाराजगी देखी जा रही है। वहीं इस विषय पर जिला प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई पर अंदरखाने प्राचार्यों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार जिले के 8 प्राचार्यों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है तथा 14 प्राचार्यों के खिलाफ वेतन वृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई किया गया हैं ।इससे जिले में शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।


अंदर खाने चल रही चर्चाओं की बात करे तो परिणामों को लेकर इस विषय पर सिर्फ प्राचार्यों पर ही कार्यवाही हो रहा है जबकि संबंधित विषय शिक्षक पर कोई भी कार्यवाही नहीं किया जा रहा है। जो समझ से परे है।
हाई स्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों में सभी विषयों में एक या दो पद व्याख्याताओं के लिए स्वीकृत है। तथा सभी स्कूलों में सभी विषय के व्याख्याता मौजूद हैं ।जो विषय विशेषज्ञ के साथ साथ संबंधित विषयों पर इनकी मास्टर डिग्री भी होता है। विषय की संपूर्ण जानकारी व जिम्मेदारी व्याख्याता का ही होता है। लेकिन ऐसे गंभीर विषयों पर सिर्फ प्राचार्यों के खिलाफ कार्यवाही कर व्याख्याताओं को इससे अलग करने पर प्रश्नचिन्ह उठ रहा है। जबकि किसी व्याख्याता के विषय में एक भी छात्र उत्तीर्ण नहीं है।याने कि उक्त विषय का परीक्षा परिणाम शून्य प्रतिशत है। मतलब 100 प्रतिशत अनुत्तीर्ण बावजूद कार्यवाही नहीं किया गया है।
केवल प्राचार्यों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है, क्योंकि परीक्षा परिणाम किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं होती। विद्यालयों में विभिन्न विषयों के अलग-अलग शिक्षक कार्यरत रहते हैं और संबंधित विषय का परिणाम उस विषय शिक्षक की जिम्मेदारी माना जाता है। ऐसे में केवल प्राचार्यों को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं माना जा रहा है।


कुछ लोगों का मानना हैं कि विषय शिक्षक या व्याख्याता के ऊपर कार्यवाही नहीं होने से भविष्य में भी ऐसे शिक्षकों के पढ़ाई के प्रति लापरवाही देखा जा सकता है।
विगत वर्षों के परीक्षाफल के तुलनात्मक विश्लेषण करने से अभी 60 प्रतिशत रिजल्ट वाला प्राचार्य लपेटे में है। क्योंकि उसका पिछले साल का रिजल्ट 100 प्रतिशत रहा है। वहीं 50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले को (इस वर्ष) प्राचार्यों को इसलिए छोड़ा गया है।की उनका गतवर्ष का परिणाम भी अच्छा नहीं रहा है। यह मापदंड गलत है। जबकि इसी मापदंड के आधार पर ऐसे शिक्षकों के ऊपर भी कार्यवाही होना चाहिए था। कुछ लोगों का कहना है कि शून्य से 30 प्रतिशत रिजल्ट देने वाले शिक्षकों पर भी कार्यवाही होना चाहिए। जिससे शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर हो रही कार्यवाही पर पारदर्शिता बना रहे जिससे सभी पर एक समान कार्यवाही हो ।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी की माने तो हाल ही में जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा परीक्षा परिणामों की जानकारी संकलित की गई थी, जिसके बाद कुछ विद्यालयों के प्राचार्यों पर कार्रवाई की गई। व इस मामले में विषय शिक्षको व व्याख्याताओं को छोड़ दिया गया है।जबकि परीक्षा परिणाम कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है और इसके लिए केवल एक व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं प्रशासन को सभी बातों को ध्यान में रखने की आवश्यकता है।

आज की खबरों की माने तो इसी विषय पर बालोद जिला के जिन 8 प्राचार्यों पर परीक्षा परिणामों को लेकर निलंबन की कार्यवाही हुई है। उसको लेकर छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन ने आपात बैठक बुलाया व बालोद कलेक्टर के इस फैसले को एकतरफा व नियम विरुद्ध बताकर इस मामले पर आंदोलन करने की बात कही है।

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