
विश्व हिन्दू परिषद के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय और विधि के शासन को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि धर्मांतरण के बाद व्यक्ति अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए उसे SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम का संरक्षण नहीं मिल सकता। यह निर्णय संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 की भावना के अनुरूप है।
डॉ. जैन ने कहा कि यह फैसला उन प्रवृत्तियों पर रोक लगाएगा, जहां धर्मांतरण के बाद भी जातिगत लाभ लेने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने इसे “धर्मांतरण माफिया” पर एक बड़ी चोट बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति के अधिकार ऐतिहासिक सामाजिक अन्याय को दूर करने के लिए हैं। यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है, तो वह उस सामाजिक संदर्भ से अलग हो जाता है, जिसके आधार पर ये अधिकार दिए गए हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि यह निर्णय सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विहिप कार्यकर्ता देशभर में ऐसे मामलों की पहचान करेंगे ताकि वास्तविक अधिकारों को सही पात्रों तक पहुंचाया जा सके।
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