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धर्मांतरण के खिलाफ लंबी लड़ाई से निकला है ” हिंदू धर्म में घर वापसी का दौर”

एक दिन में बदली पहचान:“घर वापसी” के बाद सुनील साहू को विश्व हिंदू परिषद में मिला बड़ा दायित्व

बालोद :- बालोद जिला का ग्राम मेढ़की जो कि जिला केंद्र बालोद शहर से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आज गवाह बना उन परिवारों की घर वापसी का जिन्होंने कुछ वर्ष पहले सनातन हिंदू धर्म को छोड़कर अपनी कुछ परेशानियों के चलते अपनी मूल आस्था को छोड़कर दूसरे धर्म यानी ईसाई धर्म को अपना लिया था आज साहू समाज के आयोजन में वापस हिंदू धर्म में शामिल हो गए। साहू समाज से जुड़े इन 6 लोगों को घर वापसी कराने प्रदेश साहू संघ के अध्यक्ष डॉ नीरेंद्र साहू,सुनील सोनी,जितेंद्र साहू,गोपाल साहू सहित पूरा जिला साहू समाज के बड़े नेता मौजूद रहें।
समाज में समाज के लोगों की वापसी कराने प्रदेश अध्यक्ष ने स्वयं गंगाजल से धर्मांतरित परिवारों के पैर धोए वही कार्यक्रम में उपस्थित विश्व हिंदू परिषद बालोद जिला संगठन के जिला अध्यक्ष बलराम गुप्ता ने परिवारों को धर्म ग्रन्थ रामायण भेंट की व धर्म में वापसी का स्वागत किया

हीरापुर गांव में धर्मान्तरण को लेकर आंदोलन

बालोद जिले के अंदर हिंदू धर्म समाज को कमजोर करने प्रलोभन देकर या उनकी कमजोरियों का फायदा उठाने कुछ मिशनरियों से जुड़े लोग जो अपने आप को ईसाई धर्म का विश्वासी बताते हैं। ऐसे लोगों ने तरह तरह के हथकंडे अपनाकर मतांतरण का खेल खेला था,जिले के हीरापुर,सिवनी, माहुद बी,रेंगाकटेरा, डौंडीलोहारा, डौंडी,मनकी,जेवरतला,मुजगहन जैसे सैकड़ों गांवों में लोगों को गुमराह किया लेकिन धर्मांतरण व मतांतरण के खिलाफ जन जागरण व खुलकर मैदानी लड़ाई लड़ने से विश्व हिंदू परिषद के बैनर तले हुए आयोजन व संघर्षों ने आखिरकार जिले में एक चिंगारी जलाई व समाज के बीच आवाज बुलंद करते रहे। जिसका परिणाम रहा कि जिले के अंदर ” घर वापसी जैसे कार्यक्रम की शुरुआत हुई सामाजिक संगठनों की पहल सामने आया और एक मिशाल मेढ़की गांव से साहू समाज के मंच से सामने आया।

सैकड़ों की संख्या में मतांतरण बंद करने को लेकर sdm कार्यालय पहुंचा विहिप संगठन के लोग

मतांतरण व धर्मांतरण के खिलाफ लड़ाई काफी कठिन अपनों के गुमराह होने से वर्ग संघर्ष की स्थिति बन रहा था विहिप जिला अध्यक्ष बलराम गुप्ता,पोषण बनपेला,सत्या साहू,अजय अग्रवाल,राज सोनी,उमेश सेन ने कहा कि अपने ही धर्म समाज के भाई बहनों के दूसरे धर्म से जुड़ने से समाज की परम्परा,संस्कृति, मान्यताएं अंदर ही अंदर टूट रही थी वहीं कई स्थानों में परिवारों के बीच संघर्ष की स्थिति बन रहा था यहां तक कि विरोध करने पर कानूनी दांवपेंच में फंसाने का काम भी विरोधी पक्ष कर रहा था लेकिन सभी अड़चनों से हिंदू धर्मसेवक लड़ते रहे और सफलता आज सामने दिख रहा हैं।

बालोद जिले के अलग अलग गांवों में ज्वलंत मुद्दों को लेकर विहिप के नेतृत्व में प्रदर्शन

धर्मांतरित व्यक्तियों को हिंदू भूमि पर अंतिम क्रियाकर्म के लिए जमीन नहीं देना एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित हो रहा जिले के अंदर कई स्थानों पर हिंदू धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने वालों की मृत्यु पर गांव में दफन करने पर विरोध ने समाज में जागरण का काम किया व धर्मांतरित परिवारों को सोचने पर मजबूर किया कि हिंदू धर्म को छोड़कर दूसरे धर्म में जाने से मूल समाज का विरोध भी झेलना पड़ता है। अंतिम समय में मिशनरियों से कोई सहयोग नहीं मिलता।

जिले के अंदर अवैध प्रार्थना सभाओं को बंद कराने जनजागरण व संघर्ष का दौर




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