Breaking News
google.com, pub-8616032207403459, DIRECT, f08c47fec0942fa0

Law Breaking News – अदालत ने विवाह के प्रलोभन दे कर दुष्कर्म करने के अपराध से आरोपी को किया दोषमुक्त


बालोद न्यायालय का यह निर्णय विवाह के प्रलोभन, सहमति एवं मिथ्या आश्वासन के आधार पर स्थापित संबंधों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण विधिक दृष्टांत के रूप में देखा जा रहा है।
बालोद थाना पुलिस द्वारा प्रस्तुत आरोप पत्र के अनुसार आरोपी शशिकांत मानिकपुरी ने पीड़िता को विवाह का आश्वासन देकर विभिन्न अवसरों पर शारीरिक संबंध स्थापित किए तथा बाद में विवाह से इंकार कर दिया।
अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसके परिजनों, चिकित्सीय साक्ष्य एवं वैज्ञानिक परीक्षण रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत किए जिसका विधिक तौर से बचाव करते हुए अधिवक्ता भेष कुमार साहू ने यह तर्क रखा गया कि दोनों पक्षों के मध्य संबंध पूर्णतः लंबे समय से सहमति से प्रेम संबंध स्थापित हुए थे तथा आरोपी की प्रारंभ से विवाह न करने की कोई कपटपूर्ण मंशा नहीं थी, पीड़िता बालिग एवं शिक्षित थी,.. अधिवक्ता ने विधिक की व्याख्या करते हुए कहा कि “प्रत्येक असफल प्रेम संबंध अथवा विवाह न हो पाने की स्थिति को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।”
अभियोजन ने ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया है जिससे आरोपी की आपराधिक मंशा संदेह से परे प्रमाणित हो सके। फलस्वरूप आरोपी को धारा 69 (पुराना 376) बीएनएस के आरोप से दोषमुक्त कर दिया गया।
मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता भेष कुमार साहु ने उक्त प्रभावशाली एवं तथ्यपरक पैरवी करते हुए, विधिक सिद्धांतों को सुव्यवस्थित ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। उनकी तार्किक दलीलों एवं विधिक विश्लेषण को निर्णय में महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
वर्तमान समय में विवाह के प्रलोभन से संबंधित मामलों में शीर्ष न्यायालय ने पारित “सहमति” और “मिथ्या आश्वासन” के बीच के अंतर की विधिक व्याख्या को न्यायिक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
✍🏻🅱️🌾
My Opinion – ऐसे मामलों में यह सिद्ध करना आवश्यक है कि आरोपी ने प्रारंभ से ही मिथ्या वचन देकर गलत काम हेतु सहमति प्राप्त की थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *