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किसी वर्ग या परिवार विशेष को टीकाकरण में महत्व देना प्रदेश की अन्य जनता के साथ अन्याय :- आशीष द्विवेदी


18 वर्ष से लेकर के 44 वर्ग आयु के लोगों को संपूर्ण टीकाकरण हो इसकी मांग काफी पहले से चल रही थी ।केंद्र सरकार ने इन आयु वर्ग के सभी को को सभी को राहत देते हुए 1 मई से इनको भी टीकाकरण की सुविधा मिलने के निर्देश राज्यों को दिए थे। किंतु अनेक राज्यों ने यहां भी राजनीति को नहीं छोड़ा छत्तीसगढ़ मैं भी एक ऐसा आदेश पारित किया , जिसने सभी को अचंभित कर दिया ।छत्तीसगढ़ सरकार ने निर्णय लिया कि 18 वर्ष लेकर के 44 वर्ग आयु के अंतोदय परिवार को पहले टीकाकरण किया जाएगा उसके पश्चात बीपीएल परिवार को और उसके बाद एपीएल कार्ड धारियों को टीकाकरण करने का का निर्णय लिया । जिससे टीके के अनेक डोज ना सिर्फ बेकार हुए अपितु अनेक परिवार एवं वर्ग दुखी एवं आक्रोशित नजर आए ।इसका परिणाम यह हुआ कि कुछ लोगों ने माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में इसके विरूद्ध जनहित याचिका दायर कर दी ।जाहिर था सरकार का निर्णय न सिर्फ नीति विरुद्ध बल्कि किसी एक विशेष वर्ग एवं परिवार को लाभ पहुंचाने की मंशा को लेकर किया गया था ।माननीय उच्च न्यायालय ने सरकार के इस आदेश को गलत बताते हुए सभी वर्ग के लोगों को टीकाकरण एक समान लगाने की आदेश जारी किए। माननीय न्यायालय के आदेश के बाद भी सरकार में पुनःएक ऐसा निर्णय दे दिया जो फिर एक बार विवाद में आ गया ।जैसे ही माननीय उच्च न्यायालय का निर्णय आया उसके पश्चात सरकार ने छत्तीसगढ़ में 18 वर्ष लेकर के 44 आयु वर्ग के लिए टीकाकरण पर रोक लगा दी । प्रदेश मे इस वक्त भी कोरोना महामारी अपने चरम पर है और सभी के लिए टीकाकरण कितना महत्वपूर्ण है यहां हर कोई जानता है ,बावजूद इसके सरकार ने टीकाकरण रोक कर एक बार फिर छत्तीसगढ़ की जनता को परेशानी एवं मुसीबत में डाल दिया । सरकार के इस निर्णय के विरोध में प्रदेश भाजपा आज के दिन को काला दिवस के रूप में मनाते हुए सोशल मीडिया पर इसका जोर शोर से प्रचार प्रसार कर रहा है ।भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला प्रशिक्षण सह प्रमुख एवं मंडल प्रभारी अंबागढ़ चौकी आशीष द्विवेदी ने शासन के इस निर्णय का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि शासन के इस प्रकार के निर्णय से आपसी सौहार्द भाईचारे एवं सद्भावना का माहौल भी बिगड़ता है क्योंकि कोरोना जात पात धर्म अमीर गरीब एपीएल बीपीएल एवं सामान्य परिवार को देखकर संक्रमित नही करता है वह किसी को भी अपने संक्रमण की चपेट में लेकर नुकसान पहुंचा सकता है। अतः इस बीमारी के बचाव और रोकथाम के लिए टीकाकरण बिना किसी भेदभाव के सभी वर्ग को समान रूप से करना ही उचित होगा । उच्च न्यायालय को टीकाकरण में रोक के सरकार के इस निर्णय पर पुनः निर्देश जारी करना पड़ा कि टीकाकरण सभी वर्ग को समान रूप से लगना चाहिए अब देखना यह है कि सरकार के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का अक्षरतः पालन किया जाता है या फिर टीकाकरण कार्य के लिए कोई अन्य निर्णय दिशा निर्देश जारी किया जाता है।

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