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हर हर महादेव व ओम नमः शिवाय के पंचाक्षरी मंत्रो के उच्चारण से जामड़ीपाटेश्वर धाम परिसर हो गया गुंजायमान,पार्थिव शिवलिंग का पूजा अर्चना के साथ रुद्राभिषेक सम्पन्न हुआ

डौंडीलोहारा :- जामड़ी पाटेश्वर धाम के श्री हनुमान नंदी शाला गौ अभ्यारण्य में शिव कथा व अनुष्ठान के तीसरे दिवस मंगलवार को सुबह 9 बजे 21 जोड़ी यजमानों ने लगातार 3 घंटे पार्थिव शिवलिंग का पूजा अर्चना के साथ रुद्राभिषेक करते रहे। 11 वेदपाठी ब्राह्मणों ने भगवान महाकाल के दिव्य मंत्रो का उच्चारण करते हुए विधी विधान से अभिषेक करा रहे थे। उपस्थित जनसमुदाय हर हर महादेव व ओम नमः शिवाय के पंचाक्षरी मंत्रो का उच्चारण कर वन परिसर को गुंजायमान कर थे। दोपहर 1 बजे वृंदावन की व बेमेतरा की भजन मंडली ने समा बांधा। दोपहर 2 बजे संत श्रीराम बालक दास महात्यागी ने साध्वी सरस्वती का आगवानी करते हुए बाजे गाजे के साथ मुख्य मंच में विराजमान कराया। जहां भक्त समुदाय ने तालियाँ बजाकर सम्मान किया। स्वागत सत्कार चल रहा था उसी समय अचानक घोठिया के चैतराम नागवंशी ने कंधे पर एक बछड़े को बिठा कर व एक बछड़े को अपने साथ चलाते हुए मंच के सम्मुख पहुंच कर नाचने लगे तो तुरंत ही संत राम बालक दास महात्यागी ने हाथ से इशारा करते हुए मंच में बछड़े को लाने कहा जैसे ही कथा व्यास में दोनों बछड़े पहुंचे तो श्रद्धालु भक्तों ने गौ माता की जयकारा करने लगे। शिव कथा व्यास साध्वी सरस्वती के गोदी में एक बछड़ा बैठकर कथा का श्रवण पान कर रहे थे तो दूसरा बछड़ा व्यास मंच में विचरण कर अपनी माँ को आवाज दे रहा था । वहीं पंच गौमाता मंदिर से उनकी माँ रम्भा कर अपने भाषा में कुछ बोल रही थी। ऐसा अदभुत संयोग कि जब जब पाटेश्वरधाम में यज्ञ अनुष्ठान या कथा पुराण होता है तो गौमाता अपने बछड़े को जन्म देती है। सोमवार को एक बछड़े का जन्म हुआ जिसका गुरुशरण नामकरण किया गया। मंगलवार को जन्म लिये बछड़े का भी नामकरण किया गया। साध्वी सरस्वती ने बछड़ों का नामकरण करते हुए ऋषि मुनियों की प्राचीन काल के कथा पर प्रकाश डालते हुए गौ महिमा का वर्णन करते हुए सभी के घर में गौमाता रखने का संदेश दे रही थी। साध्वी सरस्वती ने भगवान भोलेनाथ की बारात जाने का व्याख्या कर रही थी उसी समय भगवान भोलेनाथ की मनोहारी बाराती की झांकी मंच की ओर बढ़ने लगी तो लोग झांकी को अपलक निहारते रहे मानो एकपल के लिये भगवान शंकर स्वयं मंच के सम्मुख उतर गये हो ऐसा महसूस हो रहा था।ढोल ,नगाड़े, मृदंग, शंख, घंटी घड़ियाल जब बजने लगी तो भक्त समुदाय नाचने से अपने आपको रोक नहीं पाये। माता पार्वती के साथ महिलाएं व भगवान शंकर के साथ पुरुषों ने शामिल होकर विवाह का रस्म पूरा किया। ऐसा दृश्य क्षेत्र वासियों को पहली बार देखने को मिला है। सभी भक्त समुदाय नाचते गाते आंनदित हो रहे थे। पाटेश्वर धाम के संत श्रीराम बालक दास जी महात्यागी ने संध्या 5 बजे बाबा महाकाल का रुद्राभिषेक व भस्म अभिषेक व आरती करने पहुंचे तो उनकी सिर की लंबी जटा अचानक खुलकर बाबा महाकाल के समीप मंडराने लगे यह दृश्य भक्तों को सुकून दे रहा था।

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