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छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के हरेली रैली में आखिर भारी भीड़ क्यों उमड़ रही है ?

एक छत्तीसगढ़िया सदस्य की जुबानी


आप कल्पना करे कि मात्र 7-8 वर्ष पहले स्थापित कोई संगठन एक सभा ही नही बल्कि प्रदेश के दर्जनों सभाओं करके हर सभा में हजारों लोग इकठ्ठा कर ले । इतने ही वर्षों में किसी राज्य के दर्जनों शहरों में अपना संगठन स्थापित कर ले , अपने कोर कमेटी के एक आह्वान पर हजारों के संख्या में सड़को पर उतर आये । तो निश्चित रुप से इस संगठन के सुनियोजित सफलता की पड़ताल करना जरुरी हो जाता है । मै बात कर रहा हुं छत्तीसगढ़ में तेजी से अपनी जमीन मजबुत कर रही गैर राजनैतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना की । इस संगठन की जुझारुपन , कुशल नैटवर्किग ही कि अगस्त की पहिली पखवाडे में ही प्रदेश में ताबड़तोड़ डेढ़ दर्जन से ज्यादा रैली कर डाले । इस संगठन की खुबसूरती कि इससे जुड़े सेनानी की जान पहचान पुरे प्रदेश स्तर में है। क्योकिं समान उद्देश्य के कारण इसके सेनानी, विशाल छत्तीसगढ़ की भुमी नापकर दुसरे जिले की सेनानी से मिलते रहते है जैसे दुर्ग के सेनानी रायगढ़ से तो कोरबा के सेनानी धमतरी से । ये खुबसूरती आपको किसी राजनैतिक पार्टी में देखने को नही मिलेगी । खैर… अब सवाल यह है कि इस संगठन को जोरदार सफलता क्यों मिल रही है? आखिर ये चाहते क्या है ? आम छत्तीसगढ़िया इस संगठन के मुरीद क्यों है ? इस संगठन से लोग क्यों जुड़ रहे है ? सबका एक ही जवाब है कि अविभाजित मप्र के समय से बदस्तूर जारी शोषण के बाद छत्तीसगढ़ियों में इस संगठन के रुप में अपना उज्ववल भविष्य देखना । लोगों को लगने लगा है कि छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ही वह छत्रप है जो हमारी भाषा , संस्कृति, खोये हुये अधिकार को फिर से स्थापित कर सकती है । हमे रोजगार देने के लिए लड़ सकती है , और ये विश्वास अचानक से नही बल्कि इस संगठन के वर्षों से जारी कठिन मेंहनत से बनी है ।
आप सोचिये कि छत्तीसगढ़ी को लेकर खुद छत्तीसगढ़िया लोग ही हीनता से ग्रसित थे उस मातृभाषा छत्तीसगढ़ी को राज सिंहासन पर बैठाने के लिए इस संगठन ने कमर कसी हुई है । छत्तीसगढ़ी के लड़ाई को इन्होने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक सर्वप्रथम पहुंचाया जब छत्तीसगढ़िया महिला क्रांति सेना ने दिल्ली के जंतर मंतर में 7 दिनों तक अनशन किया , और इसी महिने की ही बात है जब इसी संगठन ने छत्तीसगढ़ी की लड़ाई को प्रदेश के शीर्ष न्यापालिका के द्वार पहुंचाया , ये ही वो संगठन है जिसने छत्तीसगढ़िया द्वारा सदियों से मनाते आ रहे लेकिन विगत कुछ दशकों से रसातल पर जा रहे हरेली , छेरछेरा, भोजली जैसे ठेठ स्थानीय त्यौहारों पर प्राण फुंका । यही वो संगठन है जिन्होनें राज्य निर्माण के बाद लोगों को इस मिट्टी के लिए जेल जाना सिखाया । इस संगठन के प्रदेश संयोजक और प्रदेश अध्यक्ष पहले ही छत्तीसगढिया हित मे 97 दिन जेल काट चुके है, अभी ताजे मामले में ही इस संगठन के 6 सेनानियों ने 188 दिन की जेलयात्रा करके अपने ही साथियों के पुराने रिकार्ड को ध्वस्त कर दिया। संगठन में जेल जाने वाले सेनानियों के आंकड़ा भी अब सैकड़ो तक पहुच चुका है जिसमे महिलाओं का भी भरपूर योगदान रहा है। मजाल कि आप कोई ऐसे और संगठन बता दे या राजनैतिक दल ही बता दे जो छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी, छत्तीसगढ़ियों के लिए ऐसी कार्य कर रही है ? और यही वो स्वाभिमान , अस्मिता , माटी की सौंधी सुंगध है कि है यह संगठन आज तेजी से अपने बुलदिंयो की ओर अग्रसर है ।

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