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नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में लव कुमार महराज ने सुनाई परिक्षित कथा

cg24 आजतक न्यूज

डोंडी लोहारा — स्थानीय राजापारा दुर्गा चौक मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में लव कुमार महाराज ने कहा कि राजा परीक्षित ने गंगा के तट पर श्री शुकदेवजी से पूछा कि जो व्यक्ति मरने की तैयारी नहीं किया हो ऐसे व्यक्ति को क्या करना चाहिए। निर्माण पुरूष का क्या कर्तव्य होता है। तो शुकदेवजी ने बताया कि यह पूरे संसार का प्रश्न है। कोई भी व्यक्ति इस दुनिया में जीने के लिए नहीं आया है। मरने के लिए आया है। जिस दिन से हम जन्म लेते हैं, उसी दिन से हमारी मृत्यु शुरू हो जाती है। रोज हम मर ही रहे हैं। मृत्यु का मतलब है परिवर्तन। जो दुनिया हर क्षण, हर पल परिवर्तन होती है। यानी जो अभी है, वह आधे घंटे बाद नहीं रहेगा। शास्त्र में बताया गया है कि मनुष्य सतयुग में 1 लाख वर्ष जीते थे। 21 हाथ लम्बा होते थे। समाधि लगाकर भगवान को प्रसन्न करते थे। त्रेतायुग में दस हजार वर्ष जीते थे। चौदह हाथ लम्बा होते थे। यज्ञ यज्ञादि द्वारा अपना कल्याण करते थे। द्वापर में एक हजार वर्ष की आयु बताई गई है। उस समय मंदिर पूजा द्वारा अपना कल्याण करते थे। कलियुग में 100 वर्ष की आयु बतायी गई थी। इसमें भगवान को पाने का सबसे सहज और सरल उपाय है परमात्मा की गुण, भजन, ध्यान करना, जप करना।कलियुग में यज्ञ करना कठिन काम तुलसीदास जी ने बताया है कि कलयुग में यज्ञ करना कठिन काम है। कोई नास्तिक है। कुपंथी है। कोई कहेगा हम संत नहीं मानते हैं, हम धर्म नहीं मानते हैं। कोई कहेगा इतना पैसा जला दिया। कई तरह के लोग कई प्रकार की बातें कहते हैं। वहीं शराब पीने में वेश्यावृत्ति करने में, गांजा पीकर धुआं उडा दिया जाता है। परंतु नास्तिक लोग उसको नहीं मानेगा। परंतु यज्ञ होगा तो उपदेश देना शुरू कर देता है। इसीलिए तुलसीदास जी ने सोचा कि कलियुग में नालायक लोग भी हो जाऐंगे। इसीलिए भगवान के नामों का जपने से तीर्थ यात्रा, यज्ञ तथा समाधि का फल मिल जाता है। इस कथा को सुनने के लिए पुरे नगर से लोग आ रहे। वहीं इस दौरान लोगों को कई जानकारी दी जा रही है।
श्रीमद्भागवत आयोजन मे विशेष सहयोग माया जयेश ठाकुर, रहीमत कोसमा, सुहद्रा देवांगन, दशोदा भुआर्य, लता वैष्णव, स्वाती राजपूत, झरियान बाई, चुनेशवरी देवी, आगेशवरी देवी, श्याम बाई, केसर बाई, मैना बाई,गेंदा बाई, अस्वनतिन बाई, जयेंत्री देवी के साथ समस्त नगर वासी का हैँ, परिक्षित रूप मे कथा श्रवण का लाभ, रेखा बाई यादव शत्रुघ्न यादव का मिला हैँ।

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