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● निजी अस्पताल के शुभारंभ पर बतौर शामिल हुई चिकित्सा अधिकारी
● अस्पताल में सेवा देने वाले डाक्टरो का बाकायदा फ्लैक्स लगाकर योग्यता का प्रचार प्रसार

● cg24 आज़तक न्यूज

निजी अस्पताल के शुभारंभ पर बतौर शामिल हुई चिकित्सा अधिकारी


● अस्पताल में सेवा देने वाले डाक्टरो का बाकायदा फ्लैक्स लगाकर योग्यता का प्रचार प्रसार

बालोद। सरकारी अस्पतालों का विशाल और सुदृढ़ ढांचा कल खुले प्राइवेट अस्पतालों से ऐसे ही नहीं पिछड़ा है, उसके लिए सरकारी नाकामी और निजी क्षेत्र का योगदान तो है ही, साथ ही विभाग में पदस्थ शासकीय सेवको का भी सबसे ज्यादा योगदान है इससे इंकार नही किया जा सकता। एक ऐसा ही मामला बालोद जिले के गुंडरदेही ब्लाक से आया है। जहां पदस्थ खंड चिकित्सा अधिकारी छत्तीसगढ़ आचरण नियम को धता बताते हुए एक प्राइवेट अस्पताल के शुभारंभ पर बतौर अतिथि शामिल हुई। सेवा शर्तों को दरकिनार कर चिकित्सा अधिकारी ने अस्पताल में बने लेबर रूम का बाकायदा फीता काटकर शुभारंभ भी किया। गुंडरदेही खंड चिकित्सा अधिकारी के बतौर अतिथि निजी अस्पताल के उद्घाटन में उपस्थिति को सेवा शर्तो के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा। इतना ही नही इस शुभारंभ अवसर पर अतिथियों के लिए बने मंच से अस्पताल में सेवा देने वाले डाक्टरो का बाकायदा फ्लैक्स लगाकर योग्यता का प्रचार प्रसार भी किया गया।

● चिकित्सा अधिकारी निजी अस्पताल के शुभारंभ में बतौर अतिथि हुई शामिल ●

मामला जिले के गुंडरदेही विकासखंड का है। 3 मार्च गुरुवार को राजेन्द्र फ्यूल के सामने अर्जुन्दा चौक में नवनिर्मित शिवालया हॉस्पिटल का भव्य शुभारंभ किया गया। जहां संसदीय सचिव एवं विधायक कुंअर सिंह निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष सोनादेवी देशलहरा, ब्लाक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष भोजराम साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि अतिथि के तौर पर शामिल तो हुए लेकिन प्राइवेट हॉस्पिटल के इस सार्वजनिक ओपनिंग कार्यक्रम में बतौर विशेष अतिथि खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ रेणुका प्रसन्नो भी शामिल हुई। जहां उनके द्वारा अस्पताल के लेबर रूम का फीता काटकर शुभारंभ किया गया।

● जाने क्या कहता है शासन का नियम ●

छत्तीसगढ़ आचरण नियम 1965 की माने तो शासकीय अधिकारी किसी प्रकार का उद्घाटन, अनावरण और शिलान्यास नहीं करेंगे। यदि इन कार्यों के लिए किसी शासकीय अधिकारी को आमंत्रित किया जाता है तब उसे चाहिए कि वह आमंत्रण को स्वीकार न करे। ऐसे कार्यों को अशासकीय कार्यकर्ता द्वारा ही संपादित करना है। इसी प्रकार सार्वजनिक कार्यक्रमों में विशेष अतिथि अथवा अध्यक्ष बनने के आमंत्रणों को भी शासकीय अधिकारियों द्वारा स्वीकार नहीं करना है।

● प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक, बावजूद कुछ निजी अस्पताल सरकारी डाक्टरों के पास ●

मजेदार बात यह भी है कि जिला अस्पताल के चिकित्सक पहले तो चोरी-छिपे मरीजों को देखते थे, लेकिन अब वह खुलेआम निजी अस्पताल का प्रचार प्रसार करते हुए नजर आने लगे है। जिले में कुछ निजी अस्पताल तो सरकारी डाक्टरों के ही हैं। सरकार भले ही सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने को लेकर सख्त है। लेकिन यहां सब कुछ स्वास्थ्य विभाग की रजामंदी से चल रहा है। मरीजों को इलाज के नाम पर लूटा जा रहा है और स्वास्थ्य महकमे के साथ जिला प्रशासन भी चुप्पी साधे बैठा है।

● निजी अस्पताल के शुभारंभ पर डाक्टरो की योग्यता का प्रचार प्रसार ●

छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल की माने तो प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंग होम मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं का प्रचार कर सकते है। लेकिन डाक्टरों की खूबियों के बखान करने पर रोक बरकरार है। प्राइवेट अस्पताल मरीजों को कौन सी सुविधा दी जा रही है। अस्पताल में कौन-कौन सी मशीनें उपलब्ध हैं। अस्पताल में उपलब्ध मशीनों से मरीजों को होने वाले फायदे और अस्पताल में किस सुविधा की क्या फीस ली जा रही है इसका प्रचार तो कर सकते है, लेकिन अस्पताल में सेवा देने वाले डाक्टर अपनी योग्यता या डिग्री के बारे में प्रचार नही कर सकते। डाक्टर ये भी नहीं बता सकेंगे उन्होंने क्या उपलब्धि हासिल की है। इस पर अभी भी प्रतिबंध है। बावजूद इसके शिवालया हॉस्पिटल के शुभारंभ पर फ्लैक्स के माध्यम से अस्पताल में उपलब्ध डॉक्टरो की योग्यता या डिग्री का प्रचार प्रसार किया गया।

उनके द्वारा बुलावा दिया गया था। मैंने मना भी किया था कि मैं जाना नही चाहती। वो बोले कि आपको आना है। मैं वहां ज्यादा देर रुकी नही। विधायक की पत्नी के द्वारा उद्घाटन के बाद उन लोगो की इच्छा थी कि मैं लेबर रूम का उद्घाटन करू। बस इतनी सी बात है, ज्यादा देर वहां नही रुकी क्योकि मेरे यहां भी कार्यक्रम चल रहा था। उन लोगो ने कहा कि लेबर रूम का उद्घाटन कर देना आप फीता काट देना: डॉ रेणुका प्रसन्नो खंड चिकित्सा अधिकारी, गुंडरदेही

मैं देख लूंगा क्या मामला है। संज्ञान में आएगा कि बतौर अतिथि उनका नाम कार्ड में होगा तो कार्रवाही करेंगे। मामले की जांच होगी। आपके माध्यम से मेरी जानकारी में आया है, मामले की जांच करवाएंगे: डॉ शैलेन्द्र मंडल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बालोद

जब सरकारी सिस्टम बिगड़ता है तो ही प्राइवेट सिस्टम डिवेलप होता है। यही कारण है कि सरकारी अस्पताल अभी खुल रहे प्राइवेट हॉस्पिटलों से पिछड़ रहे है। नियम कायदों को दरकिनार कर चिकित्सा अधिकारी अगर अपने ही सेवा क्षेत्र के निजी अस्पताल उद्घाटन में अतिथि बनकर शामिल होंगे तो मरीजों को रुख प्राइवेट अस्पतालों की ओर होगा: देवलाल ठाकुर भाजपा नेता , पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष

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