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सरकारी विभागों की उदासीनता व योजनाओं का सही क्रियान्वयन नही होने से पर्यावरण व पौधारोपण पर सही सफलता नही मिल रहा


CG 24 आजतक
रिपोर्टर बोधन भट्ट मालीघोरी
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष
बालोद जिला का लगभग 40% भाग वनों से घिरा हुआ है ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों की आजीविका वा जीविकोपार्जन वनों से प्राप्त जड़ी-बूटी हुआ फलों से होती है
बालोद के जंगल में दुर्लभ जड़ी बूटी की भरमार है जिससे
इस जड़ी बूटी से मानव रोग ,पशु रोग ,फसल के रोग में उपचार किया जाता हैं।
शासन के द्वारा बनाए गए योजना फ्लाप होती नजर आ रही है
शासकीय योजनाएं मात्र कागजों में ही सिमट कर रह गई है
धरातल पर मात्र सूखी हुई खुटिया है मनरेगा वन विभाग कैंम्पा छत्तीसगढ़ राज्य वन औषधि पादपबोर्ड नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड अनेक विभागों द्वारा वृक्षारोपण mpca क्षेत्र में अनेक योजना पर बजट तो खर्चा करते हैं लेकिन रखरखाव व देखभाल नहीं होने से सारी योजनाएं बंटाधार है कर्मचारी से लेकर आम जनता जनप्रतिनिधि अपने दायित्वों को नहीं समझते अगर समय रहते नहीं समझेंगे तो पर्यावरण का विनाश हम सब को भुगतना पड़ सकता है पर्यावरण जैवविधि नष्ट होना मानव का पर्यावरण पर अतिक्रमण करने से हो रहा है कारखाने के लिए अत्यधिक कच्चा माल के लिए वनों की कटाई फसलों में जहरीली कीटनाशक का छिड़काव आज के युवाओं को अपने क्षेत्र की जैवविधिवता पर रुचि नहीं छत्तीसगढ़ शासन औषधि पादप बोर्ड के द्वारा सिर्फ लोगों को ट्रेनिंग देकर छोड़ देते हैं छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा पर्यावरण बचाने के लिए हर साल गांव-गांव में वृक्षारोपण के लिए लाखों रुपया खर्चा कर मनरेगा के तहत वृक्षारोपण का कार्य किया जाता है पर विभाग के द्वारा देखरेख के अभाव में यह योजना दम तोड़ रही है साल भर देखने के बाद पता चलता है वहां पर पूरा बंजर भूमि ही दिखाई देती है पर्यावरण पार्क भी अधूरा पड़ा हुआ है।

सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई है बालोद जिला का चितवा डोंगरी

जिला प्रशासन के द्वारा डौंडीलोहारा ब्लाक के ग्राम सहगांव के समीप गोंदली जलाशय के किनारे स्थित चितवा डोंगरी पहाड़ पर्यावरण सुधार ,जीव जंतु सुरक्षा ,औषधि पौधा के लिए जिसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी जिला प्रशासन के द्वारा की गई थी जो अभी भी अधूरा पड़ा है विभागीय उदासीनता के चलते यह नहीं हो पा रहा है वन विभाग ,व राजस्व विभाग का कहना हैं कि चितवा डोंगरी पहाड़ जिला प्रशासन ने पर्यटन स्थल के रूप में चयनित किया गया जिसे पंचनामा बनाकर पर्यटन विभाग रायपुर को भेज दिया गया है l

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