
बालोद प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय आत्मज्ञान भवन में 24 जून मम्मा डे पर मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की 57 वी पुण्यतिथि भावपूर्ण श्रद्धांजलि मनाई गई ब्रम्हाकुमारी विजय लक्ष्मी दीदी के साथ साथ उपस्थित सभी ब्रह्माकुमार बहनों एवं भाइयों ने मिलकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए मातेश्वरी का जीवन अत्यंत आदर्श होने के कारण सभी के लिए प्रेरणादाई है एक मां की तरह पालना की उनके जीवन में अपनाया गया सिद्धांत संस्था के लिए प्रमुख सूत्र बन चुके हैं मम्मा हमेशा कहां करती थी हर घड़ी अंतिम घड़ी है दूसरा हुकुम हुकुम चला रहा है उनकी कई शिक्षाएं ब्रह्मा वत्स की जीवन की धारणा बन गई 24 जून 1965 को मातेश्वरी जी ने अपने पार्थिव शरीर का त्याग किया
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