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मकान की स्थिति ऐसी की किसी भी दिन भारी बरसात में ढह जाए


Cg 24 आज तक
रिपोर्टर,, बोधन भट्ट बालोद
शासन की योजनाओं की खुली पोल सिस्टम से हारे गरीब परिवार शासकीय कार्यालय के कई चक्कर लगाने के बाद भी नही मिला प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ, मकान की स्थिति ऐसी की किसी भी दिन भारी बरसात में ढह जाए
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी आज तक नही ली गरीबों की सुध, केंद्र सरकार ने गरीबों के लिए तमाम योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है सरकार गरीबों के लिए तमाम योजनाएं बना रही है, लेकिन सभी योजनाएं कागजों तक ही सीमित है सरकारी योजनाएं कागजों से निकलकर जरूरतमंदों को कब नसीब होंगी
ऐसा ही एक मामला बालोद जिले के ग्राम पंचायत घुमका के आश्रित ग्राम धौराभाठा का है जंहा एक गरीब परिवार अपने कच्चे मकान में पत्नी वा 2, बेटे के साथ एक टूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं हालात ऐसी की आर्थिक तंगी के चलते अपने आशियाने को बनाने में भी असमर्थ है उस झोपड़ी की हालत ऐसी है कि कभी भी ढह जाए और कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है
पक्के मकान के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई बार पंचायत के चक्कर लगाए लेकिन हमेशा आश्वासन ही मिला , पंचायत से कई बार टीम आई फोटो खींच कर ले गए लेकिन कार्यवाही आगे नही बढ़ी और आज भी टुटे हुए मकान में रहने को मजबूर हैं
अमर सिह ने बताया कि पंचायत में आवास को लेकर कई बार आवेदन भी दिया गया है और लिस्ट में नाम भी आ चुका था लेकिन आज पर्यन्त तक कोई लाभ नही मिला सिस्टम से हारने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनो सरकार से विश्वास उठने लगा है कई बार अपने आवास बनाने को लेकर पंचायत के चक्कर लगाए लेकिन उन्हें शासकीय योजना का लाभ नही मिला पाया पिछले चार साल से स्थिति जस की तस है और अब भाजपा एंव कांग्रेस दोनो सरकारों से भरोसा उठ गया है
क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य ,जनपद पंचायत सदस्य ने भी कभी सुध नही ली
अपने ससुराली जमीन एक एकड़ जमीन में खेती कर अपने घर चलाने को मजबूर है उसमे साल में 15 से 20 हजार तक ही कमाई होती है जिससे घर चलना भी मुश्किल है ,इतने कम पेसो से घर बनाना तो बहुत दूर उसकी मरम्मत भी नही करा सकता , पिछले साल आर्थिक स्थिति कमजोर होने के के कारण घर की मरम्मत भी नहीं करा पाए
2 दिन की लगातार बारिश होने पर भी कोई जनप्रतिनिधि गरीब के घर नही पँहुचे और
सरकार गरीबों के लिए तमाम योजनाएं बना रही है, लेकिन सभी योजनाएं कागजों तक ही सीमित है , इन योजनाओं के नाम पर भरस्टाचार चरम सीमा पर है जिसके चलते इसका लाभ गरीबो को नही मिल पा रहा है आखिर ये सरकारी योजनाएं कागजों पर ही सीमित है ।

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