
सत्तापक्ष के खिलाफ स्थानीय मुद्दे भी बहुत पर लगता है संगठनात्मक कमजोरी,कार्यकर्ताओ में बिखराव,व मजबूत नेतृत्व की कमी के चलते भाजपा पार्टी कांग्रेस विधायक के विरोध में नही उतर पा रहा
वैसे विधानसभा चुनावों में अभी समय है। और राजनीति फिंजा कब बदल जाये किस और मुड़ जाए यह अभी कहना मुश्किल है। लेकिन क्षेत्रीय राजनीतिक पर्दे में जो दिख रहा उससे अभी कांग्रेस संगठन का पलड़ा भाजपा के मुकाबले थोड़ा भारी लग रहा है।
डौंडीलोहारा :-जैसे जैसे विधानसभा चुनावों का समय पास आ रहा है। वैसे ही बालोद जिला के तीनों विधानसभा क्षेत्रों में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों कांग्रेस व भाजपा संगठन में गतिविधियों में तेजी आ रहा है। जंहा भाजपा के नेता संगठनात्मक कार्यक्रमों व निर्देशो के तहत ही कार्यक्रम व आयोजन के बहाने राजनीतिक परिदृश्य में दिखाई दे रहा है। वही बालोद जिला के डौंडीलोहारा में कांग्रेस “नवाचार”का प्रयोग करते दिख रहा है। अब बात डौंडीलोहारा विधानसभा की ही देख लीजिए यंहा लगातार 2 चुनावों में बुरी तरह से हारने वाली भाजपा संगठन अभी भी हार के सदमे से बाहर निकल नही पाई है। ऐसा प्रतीत हो रहा है। क्षेत्र में स्थानीय संगठन ऊपर से मिले कार्यक्रम व उनका किसी भी तरह से निष्पादन इसी ढर्रे पर धीरे धीरे आगे बढ़ते दिख रहे है । जबकि क्षेत्र की वर्तमान विधायिका श्रीमती अनिला भेड़िया लगातार दो चुनावो में जीत दर्ज कर प्रदेश सरकार में मंत्री है। व 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी क्षेत्र के भाजपाई उनके विरोध में उनके कार्यो की मुखालफत करते राजनीतिक पर्दे पर दिखाई नही दिए,क्षेत्रीय विधायक के खिलाफ भाजपा संगठन को जिस आक्रामकता के साथ हल्ला बोलना था वो ताकत स्थानीय स्तर पर नगर हो या गांव कही दिखाई नही दे रहा, भाजपा नेताओ के एक दो चेहरे यदा कदा ऐसे ही सोशल मीडिया में दिख रहे है वही भाजपा संगठन के आयोजन में वृक्षारोपण, फल वितरण जैसे कार्यक्रम ही हो रहे,सत्ता के विरोध की आवाज नही आ रहा जिससे आमजनता में राजनीतिक संदेश सही तरीके से पार्टी का नही जा रहा है। जबकि सामने चुनाव आने वाले है।
कांग्रेस मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व के दम पर व सरकार की जन हितकारी योजनाओं को लेकर जोश से भरी हुई है। कांग्रेस में जंहा संगठन के पदाधिकारी पार्टी आयोजनों को भी कर रहे वही आगामी चुनावों के मद्देनजर आमजनता को जोड़ने क्षेत्रीय स्तर पर “राजनीतिक नवाचार” भी करते दिख रहा है। मसलन खेल कूद आयोजन,सांस्कृतिक आयोजनों, मिलन समारोह,व लगातार दौरे करके जनता के बीच पहुंच रहे है। व आगामी राजनीतिक रणनीति पर काम करते दिख रहे है। दो चुनावों में जीत से कार्यकर्ताओ में भी उत्साह बना हुआ है। अंदरूनी जानकारों की माने तो डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र में डोंडी ब्लाक के ग्रामीण क्षेत्रो,डौडी लोहारा के वनांचल क्षेत्रों में अभी भी कांग्रेस को मजबूत माना जा रहा है। वही ऊपरी सतह व मुख्य मार्गो से लगे ग्रामों में भाजपा की स्थिति मजबूत माना जा रहा है। दल्ली राजहरा, डौंडीलोहारा नगरीय क्षेत्रों में भाजपा को मदद पूर्व में मिला था जंहा कांग्रेस इस बार बढ़त के लिए पूरी ताकत लगाते दिख रहा है।
मुख्यमंत्री ने भेंट मुलाकात कार्यक्रम में अधूरे कार्यो,पुरानी मांगो को पूरा कर,आमजनता की मांग पर नवीन विकास कार्यो की स्वीकृति करते हुए क्षेत्र में निवासरत कई समाज को उनकी मांगों पर भी लाखों रुपये के कार्यो पर सहमति देते हुए आगामी चुनावों के लिए एक माहौल तैयार कर दिया है। जिसका फायदा निश्चित रूप से सत्ता में काबिज कांग्रेस व उनके मंत्री व विधायकों को मिल सकता है। वर्तमान विधायकों के खिलाफ नराजगी में यह सौगात कुछ न कुछ राहत देने का काम तो करेगा ही
सत्ता व संगठन में बेहतर तालमेल भी कांग्रेस को मजबूती दे रहा है। कांग्रेस विधायक व मंत्री श्रीमती भेड़िया के खास समर्थक क्षेत्र में हर छोटे बड़े कार्यकर्ताओं से मिलकर सामंजस्य के साथ काम करते दिख रहे है।वही भाजपा में अंदरूनी खींचतान,एकला चलो,व संगठन नेताओं में आपसी तालमेल का अभाव दिखता है। जिससे संगठन मजबूती से खड़ा नही दिख रहा,पार्टी कार्यक्रमों की खानापूर्ति जैसे रस्म अदायगी से वर्तमान समय मे लग तो नही रहा की कांग्रेसी गढ़ बने इस डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को भाजपा से फिलहाल कोई खतरा हो।
चुनावी दावेदार भाजपा में बहुत दिखाई दे रहे लेकिन विरोधी सत्ता पक्ष के विधायक यानी कि श्रीमती भेड़िया को राजनीतिक चुनौती देने में एक दर्जन नेताओं में एक दो नेता ही सामने दिखाई दे रहे है। यानी कि कह सकते है।की मुकाबले में सामने आकर राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे है।वही विधायक सीट की दावेदारी की माने तो लिस्ट अभी लंबा ही है।
भाजपा में जिला पंचायत सदस्य,जनपद सदस्य,सहित नगर पंचायत व पालिका में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि काबिज है। बावजूद सरकार विरोध में जिला,नगर या ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी भूमिका भी शून्य ही दिखाई दे रहा है। एक दो जिला सदस्य ही ऐसे है जिन्होंने खुलकर सरकार की आलोचना की है।अधिकांश लोगों की भूमिका सिर्फ बैठक तक सीमित हो गया है।
नए शामिल नेता आक्रामक :-बालोद जिला के अंदर संगठन की बात करे तो कांग्रेस से भाजपा में आये नेता राजेन्द्र राय,देवलाल ठाकुर व अभिषेक शुक्ला क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक के खिलाफ मुखरता के साथ हमलावर रहे है। जनहित के मुद्दों को उठाते रहे है। लेकिन यह क्षेत्र तक सीमित रह गया है। जबकि कांग्रेस के 3 विधायक जिले की तीनों सीटों पर काबिज है।
बालोद जिला में भाजपा नेताओं की लंबी सूची वही कार्यकर्ताओ की बड़ी फ़ौज है। बावजूद बालोद जिला स्तर पर स्थानीय मुद्दों को लेकर कोई बड़ा आंदोलन या विरोध इन सत्तासीन तीनों विधायकों के खिलाफ फिलहाल नजर नही आ रहा है।
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