
वनांचल में आश्रित ग्राम जूनापानी के दंतेश्वरी मंदिर में ज्योति कलश प्रज्वलित हो रही है। मां दंतेश्वरी को प्राचीन काल में बस्तर दंतेवाड़ा से लाकर स्थापित की गई है। इस मंदिर में आसपास के 12 गांव के लोग अपनी आस्था प्रकट करते हुए सुख-शांति की कामना करते हैं। इसी कारण इसे बसतरहीन, देश फिरतीन, बरगहीन के नाम से जाना जाता है। दंतेश्वरी मंदिर में दोनों नवरात्रि में भक्तों के द्वारा आस्था की दीप जलाई जाती है। इस वर्ष मां दंतेश्वरी मंदिर में 58 दीप जिसमें तेल की दीप 55 एवं 3 घी की दीप प्रज्वलित हो रही है। प्रथम दिवस से लेकर अष्टमी की रात्रि तक ग्राम के एवं आसपास के भक्तों के द्वारा जस भजन गीत की प्रस्तुति होती है। इस बार नवरात्रि मैं हवन पूजन के दिन भंडारा महा प्रसादी एवं रात्रि में जस जगराता भिलाई का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर के मुख्य पुजारी श्री धनेश कुमार कुंजाम, सहयोगी श्री माखनलाल कोरामे,, मोहन साहू, कनक साहू, लखेंद्र साहू हैं। मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री धनसाय साहू, कोषाध्यक्ष श्री अनिल उर्वशा, सचिव श्री संख कुमार नायक जी है। यह जानकारी ग्रामीण विकास समिति के सचिव श्री नारायण ठाकुर जी दिए।

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