

बालोद:- माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं माननीय छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद डॉ प्रज्ञा पचौरी के मार्गदर्शन में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद श्रीमती सुमन सिंह द्वारा गठित टीम के द्वारा दिनांक 31 अक्टूबर 2022 से 13 नवंबर 2022 तक कानूनी जागरूकता और आउटरीच के माध्यम से नागरिकों का सशक्तिकरण तथा हक हमारा भी तो है @ 75 के संबंध में चलाए जा रहे अभियान के तहत बालोद जिले के दुरांचल क्षेत्रों में पहुंचकर शिविर आयोजित कर, पांपलेट वितरण कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसी के तारतम्य में आज विधिक सेवा दिवस के अवसर पर बालोद जिले के स्कूलों में छात्र-छात्राओं द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई एवं अमलीडीह के हाई स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित की गई, जिसमें अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद द्वारा अपने उदबोधन में उपस्थित छात्र-छात्राओं को गुड टच बैड टच, बच्चों के संवैधानिक अधिकार, मोटर यान अधिनियम, स्वास्थ्य, बाल विवाह एवं कैरियर संबंधी जानकारी सरल शब्दों में प्रदान की गई। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद द्वारा बच्चों को नालसा की योजनाओं, सालसा द्वारा निर्मित लघु फिल्म, टोल फ्री नंबर 15100 के संबंध में जानकारी दी गई। इस जागरूकता कार्यक्रम में शिक्षक- शिक्षिका, छात्र-छात्राओं के साथ-साथ गठित टीम उपस्थित रहे। इसी दौरान ग्राम दैहान के प्राथमिक शाला में औचक निरीक्षण कर अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बच्चों से वार्तालाप किया गया एवं हक हमारा भी तो है @ 75 के तहत जिला जेल बालोद में जागरूकता शिविर आयोजित की गई जिसमें बंदियों को सूचना कार्ड वितरण किया गया।
प्रत्येक वर्ष 9 नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस मनाया जाता है जिसे विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 को लागू करने एवं विधिक सेवा के तहत प्राधिकरण अधिनियम और वादीकारियों के अधिकार को विभिन्न प्रावधानों से अवगत कराने के लिए मनाया जाता है। इस दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों में कानूनी जागरूकता फैलाना, समाज के गरीब एवं कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता एवं सलाह प्रदान करना ताकि सभी के लिए न्याय सुनिश्चित किया जा सके। नालसा का गठन समाज के कमजोर वर्गों को नि:शुल्क कानूनी सेवाएं प्रदान करने और विवादों के सौहाद्रपूर्ण समाधान के लिए लोक अदालत का आयोजन करने के उद्देश्य से किया गया है।
राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस की शुरुआत पहली बार 9 नवंबर 1995 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समाज के गरीब एवं कमजोर वर्गों को सहायता एवं समर्थन प्रदान करने के लिए की गई थी। एक कमजोर और गरीब लोगों के लिए समूह को सहायता और सहायता देने के लिए एक देश के साथ ही स्थापित किया गया था जो महिलाओं एवं बच्चों, विकलांग व्यक्तियों के सदस्य, श्रमिक, हिरासत में रखे गए व्यक्ति, ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय 1,50,000/- रु से अधिक नहीं है, मानव तस्करी पीड़ितों के साथ -साथ प्राकृतिक आपदाओं का शिकार भी हो सकता है।
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