Breaking News
google.com, pub-8616032207403459, DIRECT, f08c47fec0942fa0

महिलाओं का हो हमेशा सम्मान श्रीमती हर्षा देवांगन

श्रीमती हर्षा देवांगन
व्याख्याता
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टटेंगा, डौंडीलोहारा,जिला बालोद

महिलाओं के प्रति सम्मान प्रशंसा और प्यार प्रकट करने के लिए 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक महिला को यह अहसास कराता है कि महिला का अपना एक अस्तित्व है।एक गृहिणी घर के कामों में इतना व्यस्त हो जाती है कि अपना अस्तित्व ही खो देती है न्याय, समानता और विकास के अपने संघर्षों से देश भर की महिलाएं विभिन्न सांस्कृतिक और जाति समूहों कि सीमाओं को पार करती हैं और प्रगति की ओर अग्रसर होती हैं।महिलाओं को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने और किसी प्रकार के लैंगिक मतभेद का शिकार होने से बचाने के लिए लंबे समय से प्रयास जारी हैं। लेकिन अभी अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। पूरे साल लैंगिक संतुलन व समानता के कार्यक्रम चलाए जाना चाहिए। ताकि महिलाओं की स्थिति बेहतर हो। सही मायने में महिलाओं की बेहतरी के लिए संतुलन बनाने के लिए सिर्फ क़ानून बनाना काफी नहीं बल्कि उन सभी पहलुओं व मुद्दों की निशानदेही करनी जरुरी है जिन पर अभी भी बहुत काम करने की दरकार है। हमारे देश में महिलाओं को सामाजिक,आर्थिक,शारीरिक,व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर कैसी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं और उन पर क्या किया जा सकता है इस पर विमर्श करना जरुरी है। लोगों की सोच है की समाज में लिंग भेद नहीं है लेकिन सही मायने में देखा जाए तो समाज में अभी भी लिंग भेद विद्यमान है हमारे समाज में अक्सर कहा जाता है कि लड़कों की सुंदरता नहीं कमाई देखी जाती है लेकिन लड़कियों के मामले में स्थिति इसके उलट है। अच्छे वर की चिंता में बेटियों पर सुन्दर, स्लिम, गोरी और दमकती-चमकती दिखने के लिए कहा जाता। उन्हें हर वक्त खुद को आकर्षक दिखाने की चिन्ता सताती रहती है। परिवार के सदस्य हों या फ्रेंड्स हों , किसी प्रोडक्ट का विज्ञापन हो या मीडिया सब जगह महिलाओं की शारीरिक खूबसूरती का इतना बढ़ाचढ़ा कर बखान किया जाता है कि वे अपने वजन, रंग और शरीर की बनावट को लेकर ओवर कौंशस हो जाती है। लड़की जरा भारी शरीर की हो तो मोटी, सांवली या पक्के गेहुएं रंग की हो तो उसे काली कहने में लोग जरा भी वक्त नहीं लगाते. जबकि बेटी के अंदर गुणों का विकास जरूरी है, ताकि वो अंदर से खूबसूरत इंसान बने।

महिला दिवस समाज को यह अवगत कराता है कि प्रत्येक व्यक्ति का काम करने का अपना एक तरीका होता है समाज को बेहतर भविष्य की ओर अग्रेषित करने में महिलाओं का एक विशेष स्थान होता है। महिलाएं व्यवसायिक,शासकीय और व्यक्तिगत लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करती है।  हर एक दिन नई चुनौतियों का सामना करती है।महिलाएं त्याग बलिदान और प्यार की मूरत होती है। पुराने जमाने में शिक्षा की कमी पुरानी सोच रुढ़ीगत सामाजिक ढांचे के कारण कम उम्र में ही विवाह कर दी जाती थी तब बाल विवाह में रोक लगाया गया और भारतीय संविधान में नियम बनाया गया कि बालिकाओं की विवाह की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष निर्धारित किया गया है 18 वर्ष की उम्र में भी विवाह के लिए परिपक्व नहीं है ऐसा महसूस किया गया और भारत सरकार ने महिलाओं की शादी की न्‍यूनतम कानूनी उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने का विधेयक संसद में पेश किया है. इस बाबत बाल विवाह निषेध संशोधन बिल, 2021 में महिलाओं की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रस्ताव है। हर युग में महिलाओं को अपने आप को स्थापित करने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। भारत में महिलाओं की स्थिति में अभूतपूर्व बदलाव आया प्राचीन काल में पुरुष के साथ बराबरी की स्थिति थी। मध्ययुग में नारियों की दशा दैनिय हो गयी थी। आज अगर हम वर्तमान या आधुनिक युग की बात करें।तो महिलाओं का इतिहास काफी प्रगतिशील है भारत की महिलाएं आज प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष प्रतिपक्ष,नेता तथा प्रशासनिक क्षेत्र में,कलेक्टर,पुलिस अधिवक्ता,डॉक्टर,शिक्षक आदि पद को सुशोभित कर रही है भारत की महिलाओं की स्थिति सदैव एक समान नहीं रही इसमें युगानुरूप परिवर्तन होते रहे हैं उनकी स्थिति वैदिक युग से आधुनिक युग तक बहुत उतार-चढ़ाव हुआ। धर्म शास्त्र के अनुसार पौराणिक युग में नारी वैदिक युग में दैवी से उतरकर सहधार्मिनी के स्थान पर आ गई। धार्मिक अनुष्ठानों और यज्ञयिक कर्मों की स्थिति पुरुष के बराबर हो गयी। अब कोई भी धार्मिक कार्य बिना पत्नी के नहीं किया जा सकता। जैसे श्री रामचंद्र जी पत्नीव्रत थे। ऐसा बहुत कम पुरुष होते हैं जो पत्नी व्रत हो। जब वे अश्व मेघ यज्ञ कराये तो पत्नी के स्थान पर उनकी रमणीय स्वर्ण मूर्ति रखें। ऐसे ही अरुंधति,लोपामुद्रा,अनुसूईया आदि पतिव्रत थे। और इन्हें अपने जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ा।

भारतीय संस्कृति में नारी सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है संस्कृत में एक श्लोक

*यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमंते देवता:*

अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं लेकिन वर्तमान में हालात गंभीर हो गया है उनका जगह-जगह अपमान हो रहा है वह भोग की वस्तु है समझ कर रखे आदमी अपने अनुसार इस्तेमाल कर रहे हैं महिलाओं के साथ अभद्रता की पराकाष्ठा हो रही है हमें रोज ही अखबार और चैनलों में देखने और सुनने मिल रहा है महिलाओं के साथ छेड़खानी और सामूहिक बलात्कार इससे महिलाओं का नैतिक पतन हो रहा है आज शासन द्वारा नारी सुरक्षा के लिए नियम कानून एक्ट बना हुआ है जो पूरी तरह सुरक्षित है और नारियों के हक के लिए बना है इससे उनको अवगत कराये। महिलाएं कमजोर नहीं होती उनके पास अपार शक्ति होती है बस और उनको उनकी शक्ति से अवगत कराना है अर्थात उन्हें सशक्त करना है शिक्षा सामाजिक आर्थिक शारीरिक स्वास्थ्य आदि सभी क्षेत्रों में सफल करना होगा तभी महिलाओं को विशेष दर्जा प्राप्त होगा

     

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *