दल्ली राजहरा cg24 आजतक :- ज्ञापन के माध्यम से एम पी सिंग ने कहा है कि
कुछ दिन पूर्व राजहरा यंत्री कृत खदान में कार्यरत बी ई एम एल के ठेका कर्मियों द्वारा बी एस पी के वेल्डिंग मशीन को बी ई मेल एल के गाड़ी में डालकर बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा था जिसे चेक पोस्ट पर ड्यूटी करते सीआईएसएफ के जवानों ने रोका और पूछताछ करने पर यह बात सामने आई कि उक्त वेल्डिंग मशीन को बिना गेट पास के ही बाहर निकाला जा रहा था जो की चोरी के श्रेणी में आता है।
उक्त चोरी को रंगे हाथ पकड़ने के बाद जब सीआईएसएफ द्वारा इसकी जानकारी खदान प्रबंधन को दी गई तब खदान प्रबंधन द्वारा उठाए गए कदम कई प्रश्न खड़े करते है –
1.जब बीएसपी के किसी भी जगह से कोई भी चीज चाहे वह छोटी हो या बड़ी चोरी होती है तो प्रबंधन द्वारा तत्काल पुलिस थाने में इसकी रिपोर्ट लिखाई जाती है किंतु जब इस प्रकरण में रंगे हाथ चोरी करते तथाकथित आरोपी पकड़े गए तब खदान प्रबंधन ने क्यों इस मामले में पुलिस थाने में एफ आई आर करने से परहेज किया ?
प्रबंधन के इस कृत्य से पूरे शहर में यह चर्चा है कि संभवत उक्त वेल्डिंग मशीन खदान प्रबंधन के ही किसी उच्चाधिकारी के कहने पर इस तरह से बाहर ले जाया जा रहा था और अगर सीआईएसएफ के जवानों की तत्परता से यह पकड़ा नहीं गया होता तो शायद उक्त उच्चाधिकारी के संरक्षण में इसे बेचकर पैसों का बंदर बांट कर लिया जाता।अतः खदान प्रबंधन ने अपने अधिकारी को बचाने के लिए पुलिस थाने में कोई f.i.r. नहीं कि नगर में ही हो रही उक्त चर्चा सही भी लगती है क्योंकि जब जब खदान प्रबंधन का कोई उच्चाधिकारी किसी तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है तो सबूत रहने के बावजूद उक्त अधिकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं की जाती है बल्कि मामले को दबा दिया जाता है। राजहरा क्रशिंग प्लांट में ठेकेदार एवं एटक के कार्यकारी अध्यक्ष अनिल यादव एवं प्लांट के डीजीएम बांस्के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार में भी प्रबंधन ने यही किया और आज तक ना तो ठेकेदार पर कोई कार्रवाई की और ना ही उक्त भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की।
- बिना कोई जांच किए ही सिर्फ सीआईएसएफ के रिपोर्ट के आधार पर ही बीएमएल के उक्त तीनों ठेका श्रमिकों को बर्खास्त कर दिया गया जिसे संघ पूरी तरह से अवैधानिक मानता है।जब कंपनी के लगभग 7-8 लाख रुपए गबन करने वाले ठेकेदार और खदान प्रबंधन के अधिकारी के विरुद्ध पूरे सबूत रहने के बावजूद खदान के मुख्य महाप्रबंधक एवं अन्य उच्च अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है तब ऐसे में बिना किसी विभागीय जांच के ही उक्त तीनों ठेका श्रमिकों को केवल सीआईएसएफ के रिपोर्ट के आधार पर ही काम से बर्खास्त करना क्या न्याय संगत है?
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर संघ इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि महारत्न सेल के इकाई भिलाई इस्पात संयंत्र के बंधक खदानों में दो तरह के कानून प्रभावशील हैं जिनके आधार पर खदान प्रबंधन निर्णय लेता है-
१) किसी भी गलत/ अवैधानिक कार्य अथवा भ्रष्टाचार में अगर कोई कर्मी के ऊपर केवल 10 दोष भी लग जाए तो उस पर सभी तरह की कानूनी कार्रवाई तत्काल प्रभाव से कर दी जाती है और उसे कंपनी के नियमानुसार की गई कार्रवाई करार कर दिया जाता है।
२)अगर किसी गलत /अवैधानिक कार्य अथवा भ्रष्टाचार में अगर कोई अधिकारी अथवा प्रबंधन के अधिकारियों का चहेता ठेकेदार सबूतों के साथ भी लिप्त पाया जावे तो उस पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की जाती है और मामले को लीपापोती कर दबाने के लिए तमाम अनैतिक कार्य किए जाते हैं और दोषी अधिकारियों को कर्मियों को धमकाने की भी छूट दे दी जाती है।
खदान प्रबंधन के इस रवैया का संग ना केवल तीखी निंदा करता है बल्कि यह मांग करता है कि विषयांतर्गत उल्लेखित चोरी करते पकड़ा एबीएमएल के तथाकथित तीनों कर्मियों के विरुद्ध पुलिस थाने में एफ आई आर दर्ज कराई जावे और विधि सम्मत विभागीय जांच के उपरांत उन पर किसी तरह का दंडात्मक कार्रवाई की जावे तथा तत्काल प्रभाव से उन कर्मियों की बर्खास्तगी खत्म की जावे और उन्हें कार्य पर लिया जावे।
अगर खदान प्रबंधन पुलिस थाने में एफ आई आर करने से परहेज करता है तो इसका स्पष्ट अर्थ होगा कि नगर में चल रही है चर्चा की इसमें संभवत खदान प्रबंधन के किसी उच्च अधिकारी की संलिप्तता है सही साबित होगी और खदान प्रबंधन के इस हरकत से महारत्न कंपनी सेल की ही बदनामी होगी जिसके लिए पूर्ण रूप से केवल और केवल आईओसीएल राजहरा के उच्च पदस्थ अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे।
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