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डौंडीलोहारा के आसपास पर्यटन की अपार संभावनाएं खरखरा जलाशय और चितवाडोंगरी बन सकते हैं पर्यटन का नया केंद्र


डौंडीलोहारा – यदि कोई व्यक्ति अपने मेहमानों को लोहारा क्षेत्र के आसपास प्राकृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थलों की सैर कराना चाहे, तो उसके पास तीन बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं — धार्मिक स्थल पाटेश्वर धाम, खरखरा जलाशय और चितवा डोंगरी इनमें खरखरा जलाशय और चितवाडोंगरी ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो लोहारा से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होकर भी आजतक उपेक्षा का शिकार बने हुए हैं।
खरखरा जलाशय : प्रकृति का अनुपम सौंदर्य, लेकिन सुविधाओं का अभाव
खरखरा जलाशय कभी पर्यटकों से गुलजार रहने वाला रमणीय स्थल था। ऊँची पहाड़ियों, घने हरित वृक्षों और बीचों-बीच स्थित टापू के कारण यह स्थान किसी प्राकृतिक चित्र जैसा प्रतीत होता है। यह जलाशय न केवल अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि भिलाई इस्पात संयंत्र और सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत भी है।
लेकिन वर्तमान में यह जलाशय प्रशासनिक उदासीनता और असामाजिक गतिविधियों के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है। जलाशय तक पहुंचने वाले रास्ते जर्जर हो चुके हैं। पर्यटकों के लिए बना विश्राम गृह अब खंडहर में बदल चुका है। पेयजल, सुरक्षा, शौचालय और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नजदीक थाना होने के बावजूद यहां सुरक्षा व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण कई अप्रिय घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। यह पर्यटन स्थल आज विकास और संरक्षण की राह देख रहा है।
चितवाडोंगरी : इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम
डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम सहगांव के समीप स्थित चितवाडोंगरी प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक धरोहर का अनूठा उदाहरण है। गोंदली जलाशय के किनारे बसे इस क्षेत्र की पहचान यहां मौजूद प्राचीन गुफाओं और शैल चित्रों से होती है।
इन भित्तिचित्रों में प्राचीन सभ्यता, जंगली जीव-जंतुओं और तत्कालीन जीवन शैली की झलक देखने को मिलती है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि वर्षों पहले यह क्षेत्र जंगली जानवरों का बसेरा हुआ करता था, इसी कारण इसका नाम “चितवाडोंगरी” पड़ा।
आज यह स्थान धीरे-धीरे पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित कर रहा है। जिला प्रशासन द्वारा यहां पर्यटन सुविधाओं के विकास की योजना भी बनाई गई है, जिसमें सड़क, प्रवेश द्वार, पेयजल, पार्किंग, शौचालय और गुफाओं तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों के निर्माण की बात शामिल है।

पूर्व में पदस्थ तत्कालीन कलेक्टर रानू साहू व जिला वन अधिकारी सतोविशा समाजदार चितवा डोंगरी का निरीक्षण करते हुए।

डौंडीलोहारा नगर के युवा समाजसेवी धर्मेंद्र निषाद का कहना है कि सड़क और प्रचार-प्रसार की कमी के कारण यह स्थान पर्यटन मानचित्र पर अपनी सही पहचान नहीं बना पाया है। क्षेत्र का खरखरा जलाशय और चितवा डोंगरी दोनों ही स्थान प्राकृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि इन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं तो यह पूरा क्षेत्र एक सशक्त पर्यटन सर्किट के रूप में उभर सकता है।



किशन साहू निवासी कोटेरा का मानना है कि खरखरा जलाशय में सड़क, सुरक्षा और रेस्ट हाउस का जीर्णोद्धार तथा चितवा डोंगरी में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
आज जरूरत इस बात की है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इन प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों की ओर गंभीरता से ध्यान दें, ताकि लोहारा क्षेत्र फिर से पर्यटन के मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना सके।

खंडहर होते भवन के कारण दूर से आए पर्यटक खुले में घूमते नजर आ जाएंगे।


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