
राजनांदगांव – नगर निगम क्षेत्र राजनांदगांव में पानी की समस्या से लोगों में आक्रोश को देखते हुए महापौर ने भी अपनी सरकार को घेरा है, महापौर हेमा देशमुख ने चर्चा के दौरान इस बात को स्वीकार किया कि विगत दिनों कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलेजा द्वारा महापौर की मीटिंग बुलाई गई और इस बैठक में राजनांदगांव की मेयर हेमा देशमुख का दर्द बाहर आया, उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया है उन्ही की पार्टी के नेता उन्हें काम नहीं करने दे रहे है और किसी भी बात पर दखल देकर काम को रोकने का प्रयास करते है, अब ये मेयर साहिबा ये तक नही समझ पा रही है कि ये एक जनप्रतिनिधि है और नगर की प्रथम नागरिक है तो क्या ये जनता की सेवा के लिए जनप्रतिनिधि बनी है या अपनी पार्टी के नेताओ के आदेश का पालन करने के लिए कुर्सी पर बैठी है। आज पूरे शहर की स्थिति ऐसी हो गई है कि लोग पानी के लिए तरस रहे है और केंद्र सरकार ने इस परेशानी को दूर करने के लिए अमृत मिशन योजना योजना शुरू की थी ताकि जनता को गर्मी में पानी की समस्या को लेकर परेशान न हो, लेकिन महापौर इस काम के लिए भी गंभीर नजर नहीं आई और आज उनकी लापरवाही के कारण शहर की जनता त्राहि त्राहि कर रही है। नगरीय निकाय के मंत्री जब आए तो उनके स्वागत में खर्च करने के लिए पैसे थे लेकिन आज जनता परेशान है और महापौर बेचारी होने का दिखावा कर रही है, और मेरा तो मानना है कि यदि कोई मेयर अपने शहर में पानी जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं करा सकता तो उसको अपने पद पर रहने का कोई हक नही है, उनको नैतिकता के तहत तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।
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