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कमरछठ की तैयारी में जोरों शोरो से लगी है लता बाई सेन

डौंडी लोहारा -छत्तीसगढ़ के मानचित्र में डौंडी लोहारा नगर पंचायत हमेशा सुर्खियो मे है राजापारा डौंडी लोहारा के लता बाई सेन ने कमरछठ की तैयारी कर दोना पत्तल बनना शुरू कर दिया हैं लता बाई सेन ने बताया की भादो के कृष्ण पक्ष की छठी तिथि को हलषष्ठी पर्व मनाया जाता है. इसे कमरछठ के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन बलराम का जन्म हुआ था और उनके दो दिन बाद जन्माष्टमी को कृष्ण का जन्म हुआ था. बलराम को शस्त्र के रूप में हल मिला था इसलिए इसे हलषष्ठी भी कहा जाता है. इस दिन संतान की प्राप्ति और सुख-समृद्धि के लिए महिलाएं व्रत रखती हैं. नवविवाहित स्त्रियां भी संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं. इस दिन हल की पूजा करने और महुए की दातून करने की परंपरा है.
कमरछठ के दिन महिलाएं ये काम करती हैं:
बिना हल के उपजे पसहर चावल खाती हैं. पसहर चावल खेतों की मेड पर होता है.
गाय के दूध, दही, घी के बदले भैंस के दूध, दही, घी का सेवन करती हैं.
हल को छूती नहींं और हल चली ज़मीन पर भी पैर नहीं रखतीं.
हल से जोता गया कुछ भी नहीं खातीं.
महतारी मन से नांगर (हल) चलाकर भुइयां मिटाती हैं.
बिना हल चले भुइयां के चांउर जेला, हम्मन पचहर चांउर बनाकर छह तरह की सब्ज़ी के साथ खाती हैं.
नोनी बाबू ल देवय सगरी मइया वरदान दीदी वो, पूजा करबो
25/26आगस्त दिन इतवार सोमवार को कमरछठ व्रत बर सिर्फ भइंस के दूध के उपयोग करे जाथे एकर पीछे अइसे मान्यता हे कि इही दिन देवता मन तांत्रिक विधि ले भइंस के उत्पत्ति करे रिहिन हे. इही पाये के भइंस के दूध , दही के उपयोग कमरछठ उपास बर करे जाथे.

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