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डौंडी लोहारा विधानसभा को जीतने भाजपा को करना होगा नए नेतृत्व की तलाश,योग्य शिक्षित आदिवासी नेता को देना होगा कमान

डौंडी लोहारा/डौंडी :- माना कि अभी राज्य में विधानसभा चुनावों के लिए काफी लंबा वक्त है। और इस समय विधानसभा चुनावों को लेकर चर्चा कुछ लोगों को सही नहीं लगेगा लेकिन जितना समय चुनावों के लिए बचा है। उससे चार गुना समय से डौंडीलोहारा विधानसभा चुनावों से भाजपा हार कर लड़ाई से ही बाहर है। इसलिए आने वाले चुनावों को लेकर बेहतर तैयारी,बेहतर प्रत्याशी व संगठन को मजबूत करने में भी समय रहते काम करने की आवश्यकता है। जिसके लिए जो समय शेष हैं वो भी काफी नहीं है।

कांग्रेस पार्टी में पूर्व में देखे या वर्तमान में भेड़िया परिवार का ही दबदबा रहा है। और वर्तमान विधायक अनिला भेड़िया ने लगातार चुनाव जीतकर इसको साबित भी किया है। विषम परिस्थितियों में भी क्षेत्र की जनता को अपने भरोसे में रखकर सक्रियता के साथ नेतृत्व कर रही है। पार्टी के कार्यकर्ता एकजुट दिखाई दे रहे है। वैसे डौंडीलोहारा में जमीन पर भले ही स्थानीय भाजपा नेताओं की सक्रियता न दिख रही हो लेकिन प्रदेश संगठन के द्वारा संगठनात्मक बदलाव की ओर अगर नजर डाले तो आगामी चुनावों के मद्देनजर मंडल की संख्या बढ़ाकर व अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने के निर्णय से तो यह स्पष्ट लग ही रहा कि प्रदेश संगठन आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन की तैयारी तो अंदर ही अंदर कर ही रही है। डौंडीलोहारा विधानसभा चुनावों में पूर्व में तीन मंडल थे जिनको बढ़ाकर 5 कर दिया गया है। ताकि शहरों व नगरों से दूरी कम हो व अधिक से अधिक लोगों को जिम्मेदारी दी जा सके।

अब प्रदेश संगठन की तैयारी तो चल रहा लेकिन कांग्रेस के इस गढ़ को व 15 सालों के इस राजनीतिक सूखे को क्या सिर्फ मंडल की संख्या बढ़ाकर दूर किया जा सकता है ? इसमें प्रश्नचिन्ह तो लगता है। क्योंकि अगर पार्टी संगठन के जिम्मेदार नेता व चुनावों में जिनके नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरना हो उनका ही कमजोर प्रदर्शन हो तो जनता कैसे सपोर्ट करे प्रदेश में भाजपा की सरकार तो सत्ता में काबिज है,लोकसभा क्षेत्र की कमान भी भाजपा के भोजराज नाग के हाथों में है। यानी कि लंबे समय से स्व.सोहन पोटाई ने लोकसभा में जीत दर्ज की तब से लगातार भाजपा का कब्जा कांकेर लोकसभा पर बरकरार है । स्व अटल जी से लेकर मोदी जी का जादू जनता के सर चढ़कर बोल रहा है। परन्तु बालोद जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्र क्रमशः गुण्डरदेही, डौंडीलोहारा,व संजारी बालोद में पार्टी विगत तीन चुनावों से लगातार हार रही कहने का मतलब भाजपा लोकसभा में यही से जीत रही लेकिन विधानसभा चुनावों में बुरी तरह हार रही यानी कि मान लिया जाए कि मोदी का प्रभाव क्षेत्र के मतदाताओं पर तो है।लेकिन पार्टी जिनको भी विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार बना रही उनका परफॉर्मेंस गड़बड़ है बोले या फिर चुनावी मैनेजमेंट की कमी कहे या राजनीति में अंदर खाने हारने के बाद भितरघात जैसे शब्दों का खूब चलन होता है। इस कारण हार गए यह भी मान ले लेकिन भाजपा के लिए कही न कही कुछ तो गड़बड़ जरूर 15 सालों से इन तीनों सीटों पर चल रहा है।

पार्टी ने ऐसा भी नहीं की चुनाव जीतने रणनीति में कमी की हो कही पूर्व विधायक को मैदान में उतारा तो किसी सीट पर किसान नेता को भी मौका दिया तो नए प्रत्याशी भी उतारे यहां तक कि एक सीट पर तो कांग्रेस से आए नेता को टिकट देकर भी नया फार्मूला बनाने की कोशिश की लेकिन फिर भी बाजी हाथ नहीं लग पाया उल्टे बड़े वोटो के अंतर से हार मिला याने कि तरकश में जितने भी बेहतरीन माने जाने वाले तीर थे चुनावों में आजमा लिए गए लेकिन एक भी तीर निशाने पर नहीं लग पाया मसलन चुनावों में जीत दर्ज नहीं कर पाए।

 इसलिए भले ही आगामी चुनावों में अभी लंबा वक्त हो लेकिन भाजपा के पास अपनी कमियों को दूर करने,बेहतर संगठन बनाने व जनता का विश्वास जितने में यह समय भी कम पड़ जाएगा इसलिए बालोद जिले के तीनों सीटों पर पार्टी को जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं को जो शिक्षित व योग्य उम्मीदवार हो जमीन से जुड़ा हो उसको तैयार करना होगा ताकि वो जनता के बीच जाकर काम कर सके जनता से जुड़ सके। स्वयंभू कमांडरों वालों भूमिका में रहने वालों,दूसरे की हाथों की कठपुतली बनकर नाचने वालों को राजनीति में नकार दिए जाते हैं ।

बहरहाल राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं की बात करे तो वर्तमान में मतभेद की जगह तेजी से बढ़े मनभेद ने भाजपा की पूरी तस्वीर को बिगाड़ रखा है। बढ़ते गुटबाजी व जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का सोशल मीडिया में आते लेख,ने यह तो जाहिर कर दिया है कि स्थिति वर्तमान समय में ठीक नहीं लग रहा है।

तीनों सीटों की कमान उपमुख्यमंत्री के हाथों में तो नहीं यह हम नहीं कह रहे लेकिन जिस प्रकार से विजय शर्मा जो कि प्रभारी मंत्री है बालोद जिला के जिला प्रशासन के कार्यों में कसावट लाने के साथ साथ जिले के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर रहे उनको सुन रहे इससे कार्यकर्ताओं के बीच अच्छा संदेश जा रहा है। शांत व निराश पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में थोड़ा ऊर्जा का संचार तो हुआ है।

 अंदरखाने क्या यही चल रहा है। ये बात किसी एक दल के लिए लागू नहीं होता ये प्रायः जिसकी सरकार रहती हे सभी में देखने को मिलता है। की सत्ता की मदमस्ती में जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की कहे या संगठन नेताओं की सब जमीन से थोड़ा ऊपर ही नजर आते है। और जबतक चुनाव आता है देर हो जाता है। और ऐसे कारण से नेता तो जमीन पर गिरता ही है साथ साथ पार्टी को भी गड्ढे में डाल देता है। तो समय रहते संभालकर आगे बढ़ना ही चाहिए 

आप एक बात पर गौर करे कि भाजपा लगातार 15 सालों से चुनाव हार रही वो भी तीनों सीटों पर आखिर क्यों जिले में देखे तो सबसे मजबूत नेता व लंबे समय से संघ के अनुषांगिक संगठन से निकलने वाले नेता बालोद जिला में निवासरत है।संगठन में कार्य अनुभव भी ज्यादा है। कुछ नेता प्रदेश संगठन नेताओं के बहुत ही करीब माने जाते है। सभी वर्गों का बड़ा प्रतिनिधित्व करने वाले नेता भी मौजूद है पार्टी में तो इतने दमदार,प्रभावशाली नेताओं के रहते आखिर पार्टी को लगातार हार क्यों मिल रहा यह भी बड़े चिंतन का विषय है। लोकसभा चुनावों में मिली जीत को बेहतर प्रदर्शन मानकर चलने वालों को विधानसभा चुनावों में मिल रहे हार को भी ध्यान में रखना होगा क्योंकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लोग पूरे मन से स्वीकार कर रहे है लेकिन नीचे के चुनावों में जनता से नकारे जा रहे है।जिसको ठीक करने की आवश्यकता भी राजनीतिक दलों को है। वैसे हाल के नगरीय निकायों में मिली जीत वो त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के अच्छे नतीजों से जिले में भाजपा उत्साह से लबरेज दिख तो रहा है व आगामी तीनों सीटों पर जीत मिले इसके लिए कदम बढ़ा रहा है । लेकिन मंजिल अभी दूर है। 

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