
जीत मिलने पर कुशल नेतृत्व व बेहतर रणनीति तो हार पर किसकी जिम्मेदारी ? पलारी नगर पंचायत चुनाव में भाजपा की करारी हार
विधानसभा चुनावों में अभी समय लेकिन प्रदेश के बड़े नेताओं के लिए पलारी चुनाव समय पूर्व इशारा की सब कुछ सही नहीं चल रहा
बालोद – नए घोषित नगर पंचायत पलारी के चुनाव में कांग्रेस के यानेश साहू ने भाजपा के लखन लाल गुरुपंच को 506 वोटो के लंबे अंतराल से हरा कर नवीन नगर पंचायत पलारी के प्रथम अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त कर लिया है।
गुरूर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पलारी को भाजपा की सरकार ने नगर पंचायत का दर्जा दिया वही कांग्रेस ने इस पंचायत पर कब्जा कर लिया नगर सत्ता पर काबिज होकर
अध्यक्ष पद की जीत के साथ ही पार्षद चुनाव में भी कांग्रेस को बढ़त मिली है। 15 वार्डों वाली नगर पंचायत में कांग्रेस समर्थित 10 प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि भाजपा के खाते में 5 सीटें गईं।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही जिले के अधिकांश पालिका,नगर पंचायतों में जीत का सेहरा भाजपा के माथे पर सजा था जब बालोद जिले में भी कमोबेश यही स्थिति थी व राजनीतिक विश्लेषकों व मीडिया में जमकर प्रचारित हुआ कि संगठन के कुछ नेताओं के नेतृत्व, कुशल रणनीति व बेहतर प्रबंधन से भाजपा को जीत मिली थी।

मान लिया जाए तो सरकार के आधे कार्यकाल बीतने पर हुए चुनाव में पार्टी की करारी हार की जिम्मेदारी किसके माथे पर होगा ? कौन नेता इस बड़ी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे ।
या पूर्व की तरह विधानसभा चुनावों में लगातार जिले की तीनों सीटों पर 15 सालों से बुरी तरह हारने के बाद जिम्मेदारी से बचने का काम होगा।
पलारी चुनाव में आए परिणाम जिले की राजनीति में एक संकेत माना जा रहा है। प्रदेश की सत्ता में काबिज भाजपा सरकार की बेहतर योजनाओं के बाद भी जनता ने भाजपा को इस चुनाव में नकार दिया है। जनता भाजपा सरकार में फीलगुड महसूस नहीं कर रही हैं। प्रदेश में हुए चुनाव में कई स्थानों पर भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया है । लेकिन बालोद,कांकेर जिले में करारी हार मिली है।
भाजपा के बड़े नेताओं ने पूरी ताकत लगाया – पलारी चुनाव में प्रदेश के दो दो उपमुख्यमंत्री,मंत्री,सांसद,विधायक,पूर्व विधायक,संगठन के आला नेताओं ने भरी गर्मी में पार्टी को जिताने के लिए मेहनत किया यहां तक कि संगीत के साथ ठुमके भी लगाए लेकिन जनता की नाराजगी,मन की बात को समझ नहीं पाए आखिर में नतीजा वही जो विधानसभा चुनावों में लगातार मिल रहा और वो है पार्टी की “हार” पार्टी की हार से खुशी या गम ? यह समझने में अभी कुछ समय लगेगा। क्योंकि आज ही नतीजे निकले हैं। हार का कारण ढूंढा जाएगा,गलतियां निकलेंगी, दोषारोपण होगा समीक्षा भी होगा “लेकिन आगे कुछ नहीं होगा” यह इसलिए कह रहे की विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से 15 सालों तक लगातार हारने वाली भाजपा आज तक जिले की तीनों सीटों पर हार का कारण नहीं ढूंढ पाई पूरे प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन कर सत्ता में लौटी भाजपा के लिए जिले की तीनों सीट बेहद कमजोर माना जाता है। दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व क्षेत्रीय विधायक संगीता सिन्हा की मेहनत से कांग्रेस पार्टी के विधायक व कार्यकर्ता जिले सहित अन्य स्थानों पर मिली जीत से काफी प्रसन्न दिखाई दे रहे हैं। व इस जीत से वो आगामी समय में प्रदेश में कांग्रेस सरकार की वापसी की बात भी कह रहे हैं। बहरहाल दोनों राजनीतिक पार्टियों की आगामी रणनीति व कार्य जो भी हो पलारी चुनाव में मिली जीत ने कांग्रेस में नया जोश भर दिया है। वहीं भाजपा के अंदर मायूसी का आलम दिख रहा है। अमूमन पार्टियों के अंदर रहने वाली गुटबाजी से कांग्रेस आरोप प्रत्यारोप से जीत के बाद बच गई वहीं भाजपा में अब यह सिलसिला आगे तक बढ़ेगा यह नजर आ रहा है।
बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा पर भी पड़ेगा असर ? – यू तो भाजपा में जिले में बड़े बड़े कद्दावर नेताओं की लिस्ट है जो संगठन में बड़े पदों पर काबिज हैं।और( कोर कमेटी ) के सदस्य भी हैं।और प्रदेश संगठन नेताओं के करीबी भी माने जाते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत को देखे तो 15 सालों से विधायक सीट पर करारी हार,और सत्ता सरकार के रहते पलारी में बड़े अंतराल से मिली हार से ऐसे नेताओं की प्रतिष्ठा व पहुंच पर भी सवाल तो खड़े हो रहे होंगे ? की आखिर इतने बड़े बड़े नेताओं की पहुंच जनता तक क्यों नहीं बन रहा,जनता को पार्टी के पक्ष में क्यों नहीं ला पा रहे। अब यह सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं की हार है। या स्थानीय स्तर पर नेताओं में जनाधार की कमी से मिल रही हार है। ।देखते रहिए आगे खबरों में विश्लेषण जारी रहेगा।
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