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पलारी नगर पंचायत चुनाव में भाजपा की हार से फूटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा

बालोंद – पलारी नगर पंचायत चुनाव में कांग्रेस से बुरी तरह से हार मिलने पर बालोद जिला भारतीय जनता पार्टी के अंदर कार्यकर्ताओं में काफी गुस्सा दिखाई दे रहा है। अथक मेहनत व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के बल पर चुनाव में उतरी भाजपा को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस परिणाम को कुछ कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेताओं के द्वारा किए जा रहे उपेक्षा की बात कही है ।तो कुछ ने तो आगामी एल्डरमैन के लिए तय सूची पर भी प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि आने वाली सूची से यह तय हो जाएगा कि पार्टी तीनों विधानसभा सीट पर चुनाव जीतेगी या हारेगी।

वैसे चुनाव में हार जीत तो एक क्रम है लेकिन प्रदेश में सुशासन की सरकार के रहते जंबो जिला भाजपा संगठन के बड़े बड़े नेताओं,व प्रदेश के आला नेताओं के दौरे व चुनाव प्रचार के बाद भी मिले हार को भाजपा के कार्यकर्ता स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। और सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से अपनी बात रख रहे हैं। कोई कमीशन खोरी,दलाली की बात कर रहा तो कोई भाजपा के अंदर कांग्रेसी नेताओं की बढ़ती आमद को इसका कारण बता रहा है। वहीं कुछ लोग सरकार में अधिकारी राज चलने की बात कही,तो कुछ ने कहा कि कार्यकर्ताओं की कोई सुनने वाला नहीं तो यह तो होना ही था सोशल मीडिया में चल रहे कुछ लोगों की भावनाएं जो हम बता रहे हैं।

अब आप समझ गए होंगे कि लंबे समय से शांत बैठे कार्यकर्ताओं में अंदर अंदर कितना गुस्सा संगठन के कार्यप्रणाली को लेकर भरा हुआ है। जो पलारी नगर पंचायत चुनाव में भाजपा पार्टी की हार के बाद बाहर निकल रहा है।

CG 24 aajtak news ने अपने सूत्रों से इस चुनाव में निकले परिणाम को लेकर बात की तो यह बात भी सामने आया कि चुनाव में स्थानीय जमीनी कार्यकर्ताओं को बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिलने व बड़े बड़े नेताओं के आने पर सिर्फ मंचीय चुनावी कार्यक्रम ,आयोजन दौरे व क्षेत्रीय नेताओं की जगह दूसरे कार्यकर्ताओं को महत्त्व देने जैसे विषय सामने आए हैं। जिससे लगातार चुनाव की धमाचौकड़ी में जनता की मन की बात व जमीनी हकीकत से नेताओं का दूर दूर तक वास्ता नहीं रहा। और परिणाम सामने आ गया।

इन नतीजों के बाद भाजपा प्रदेश महामंत्री व जिला भाजपा अध्यक्ष बालोद ने कार्यकर्ताओं के मनोबल को बनाए रखने उनके द्वारा किए गए अथक मेहनत के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया व हार से निराश नहीं होने व चुनाव में मिले परिणाम की समीक्षा की बात कही है।अब देखना होगा कि सत्ता सरकार के आधे कार्यकाल बीतने पर मिली इस हार से पार्टी के अंदर मायूस व नाराज कार्यकर्ताओं में कैसे निराशा को दूर कर आगामी चुनावों के लिए जोश व उत्साह का वातावरण बनाती है। लोगों को इंतजार भी है कि पार्टी के समीक्षा में हार का कारण क्या निकलता है।

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