
बालोद cg24 आजतक न्यूज
गुंडरदेही cg 24 आज तक न्यूज़ रिपोर्टर परस साहू,,,रविवार की रात 10 बजे से तेज आंधी तूफान व गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश हुई हैं। जिसके चलते शहर के कई इलाकों में पानी भर गया।वही बारिश होने से लोगो को उमेश भरी गर्मी से राहत मिली हैं। बालोद जिले में रविवार की रात से रुक रुककर झमाझम बारिश होने से ग्रीष्मकालीन धान की फसल पूरी तरह से तबाह कर दिया हैं।लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बड़ा दी हैं।रात को आए आंधी-तूफान ने जमकर कहर बरपाया। कई पेड़ उखड़ गए। आधा शहर अंधेरे में डूब गया। कच्ची झोपड़ियां के छप्पर उड़ गए। तो कई इमारतों के खिड़की, दरवाजे क्षतिग्रसत हो गए। मौसम विभाग की माने तो गर्मी की शुरूआत के बाद जिले में इस तरह पहली बार इतनी तेज आंधी तूफान आई है। जिसने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया।
सप्ताहभर से पल पल में बदल रहा हैं मौसम का मिजाज हर 2 दिन में गिर रहा है पानी, कोरोना के बाद अब बेमौसम बारिश से आम जनजीवन अस्त व्यस्त नजर आ रहा है।

जिले में लगातार बारिश होने से रबी फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। सप्ताहभर से मौसम का मिजाज पल-पल बदल रहा है। कभी तेज धूप के साथ गर्म हवा झुलसाने लगती है, तो कभी बदली छा जाती है। गरज-चमके साथ बौछार पडऩेे लगती है। रविवार की रात जमकर तेज बारिश हुई।रविवार को दिन भर बदली छाई रही। रात 10 बजे गरज चमक के साथ बारिश देर रात तक जारी रही। तीन दिन की बारिश से जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। धान व साग भाजी की फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा नगर की जाम नालियां से कई कॉलोनी में बारिश का पानी भर गया। जिससे नगर पालिका की नियमति सफाई की पोल खुल गई है।
गुंडरदेही क्षेत्र में आज सुबह 7:30 बजे से 10:00 बजे तक तेज आंधी तूफान व बारिश से धान का पौधा जमीन में गिरा
जिले में लगातार तेज आंधी तुफान व बारिश से धान की खड़ी फसल जमीन पर गिर गई हैं।
किसानो का कहना है कि भू-जल स्तर में भारी गिरावट और बिजली समस्या से उत्पन्न पानी की समस्या से फसल सूखने से बच गई थी, लेकिन दो दिन पहले ओलावृष्टि व तेज आंधी तूफान व बारिश से धान की फसल खत्म हो गई है। इससे पहले आंधी और ओलावृष्टि के कारण खड़ी फसल खेत में गिर गई। पानी में डूबने से धान की बालियां खराब हो गईं। ओलावृष्टि से दाने भी टूटकर खेत में गिर गए। सब्जी फसल भी बर्बाद हो गई। रात में बारिश के बाद शहर में बिजली चली गई। हालांकि कई वार्डों में एक-डेढ़ घंटे बाद ही बिजली बहाल हो गई। ग्रामीण इलाकों में भी बिजली बंद रही। हालांकि बिजली फॉल्ट की शिकायत पर विभाग की टीम लगातार सुधारने में लगी रही।
खलिहान में रखे धान बारिश में भीगा
ग्रामीण क्षेत्रों में खासतौर से किसानों का धान भींग गया जो धान की कटाई मिंजाई के बाद उपज को खलिहान कोठार या घर के आंगन में रखे हुए थे। देर रात को किसान हड़बड़ाहट में धान को भीगने से बचा न पाए और सुबह हाथ मलते रह गए। धूप खिलने का इंतजार होता रहा। दूसरे दिन रविवार को दोपहर 12 बजे जब धूप खिली तो किसान व उनके परिवार भीगे हुए धान को सूखाने की जुगत लगाते रहे। किसानों ने कहा कि इस बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। अगर समय रहते धान नहीं सूखा तो वह बदरंग हो जाएगा। धान की क्वालिटी खराब होगी, इससे उसका वजन भी कम होगा और रेट भी सही नहीं मिलेगा। किसानों ने कहा कि एक तो हम कोरोना के संकट से जूझ रहे हैं उस पर इस बेमौसम बारिश ने हमारा जीना मुहाल कर रखा है।
सब्जी में टमाटर पालक का फसल हुआ तबाह,अब लागत भी नही निकल पाएंगी
जिला मुख्यालय से लगे ग्राम बधमरा,मेढ़की ओरमा के किसानों ने बताया कि खेतों फसल पककर तैयार हैं, दो दिन बाद हार्वेस्टर से कटाई, मिंजाई की तैयारी कर रहे थे। इसके पहले ही पिछले तीन दिनों से आंधी तूफान और मूसलाधार बारिश से सब कुछ तबाह हो गया है, किसानों ने बताया कि धान बालियों में कुछ ही दाना ही नहीं बचा है, सब खेतों में बिखर गए हैं। पूरी मेहनत बेकार हो गई। लागत भी नहीं निकल पाएगी।किसानों ने बताया कि मौसम यदि एक सप्ताह तक साफ रहेगा तभी हाईवेस्टर से धान की कटाई करवा सकते है।यदि मौसम साफ नही हुआ और लगातार बारिश हुई तो खेतो में हाईवेस्टर नही ले जा सकते हैं
सावन भादो के माह में होती है बरसात वैसे हीकड़कड़ाती बिजली की आवाज से दहशत में रहे लोग
जब रात में अचानक 10 बजे के बाद मौसम ने बदलाव हुआ तो काली घटा छाने लगी। देर रात तक तेज गर्जना होने लगी और घर की लाइटें भी बंद हो गई तो लोगों की नींद भी टूट गई। लोग रात को चैन से सो नहीं पाए। तेज बिजली की गड़गड़ाहट ने सब को दहशत में डाल रखा था। लोग भगवान से यह प्रार्थना भी करते रहे कि गर्जना कम हो जाए भले बारिश हो। लेकिन बारिश से ज्यादा गर्जना होती रही और लोग अपने घरों में दुबके रहे। स्थिति यह थी कि लोग घर के बाहर रखे सामानों को भींगने से बचाने के लिए भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे, क्योंकि बिजली इतनी कड़क रही थी कि आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना हुआ था। ऐसे में रात को लोग डरे सहमे भी रहे जब सुबह हुई तो स्थिति सामान्य होने लगी तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली ।
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