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बालोद :- केन्द्र सरकार जिला खनिज न्यास डीएमएफ से जिला प्रभारी को अध्यक्ष पद से हटाए जाने एवं उनके स्थान पर कलक्टर को अध्यक्ष एवं सांसद को पदेन सदस्य नियुक्त किए जाने से राज्य सरकार सकते में है। राज्य सरकार का कहना है कि जिले के प्रभारी मंत्री को ही डीएमएफ का अध्यक्ष रहने दिया जाए तथा स्थानीय सांसद को सदस्य नियुक्त किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के सांसदों ने राज्य सरकार द्वारा प्रभारी मंत्रियों के माध्यम से डीएमएफ की राशि का दुरूपयोग किए जाने एवं सांसदों को सूचित नहीं किए जाने का आरोप लगाया था। सांसदों का कहना है कि माइन्स केन्द्र
सरकार के अधीन होता है तथा माइन्स से प्राप्त सीएसआर जो करीब ३6 प्रतिशत है उसका उपयोग संबंधित जिले में विकास कार्यों पर खर्च किया जाना है।
जिले का कलेक्टर केवल प्रभारी मंत्री की सिफारिश पर राशि आबंटित कर देते थे जिसमें बंदरबाट की शिकायतें होती रहती थी। पिछले एक वर्ष के दौरान ही कांकेर जिले में कोविड 19 के लिए करोड़ों रूपए का सामान खरीदा गया जिसकी शिकायतें भी हुई थी। इधर सांसद मोहन मंडावी ने केन्द्र सरकार द्वारा डीएमएफ से प्रभारी मंत्री के स्थान पर कलेक्टर को नियुक्त किए जाने एवं स्थानीय सांसद को पदेन सदस्य बनाए जाने का स्वागत किया है।
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