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भूपेश बघेल की प्राथमिकता में आदिवासी कहीं नहीं, इसीलिए एक भी घोषणा पूरा नहीं कर पाई कांग्रेस सरकार : विकास मरकाम
रायपुर/ भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विकास मरकाम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार के ढाई साल के कार्यकाल को निराशाजनक बताते हुये कहा है कि कांग्रेस सरकार द्वारा आदिवासी समाज के लिये किये गये एक भी घोषणा या वादा को अभी तक पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस पार्टी ने अपने जन घोषणा पत्र में आदिवासी समाज को आकर्षित करने के लिये जो लोक लुभावन घोषणा किया था, जिसके परिणामस्वरूप अजजा आरक्षित 29 में से 27 सीट तथा 3 सामान्य सीट से अजजा वर्ग के कांग्रेस विधायक चुनाव जीत गये थे परंतु दुर्भाग्यवश भूपेश बघेल सरकार का आधा कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद भी आदिवासी वर्ग से किये गए घोषणा व वादों पर अब तक कोई क्रियान्वयन प्रारंभ ही नहीं हुआ है और ना ही कांग्रेस के इन 30 आदिवासी विधायकों द्वारा घोषणा को पूरा कराने की दिशा में कोई आवाज उठाया जा रहा है। ढाई साल के भूपेश बघेल सरकार की इस बेरुखी से प्रदेश में आदिवासी समाज आहत है और सत्तापक्ष के आदिवासी विधायकों की चुप्पी से लग रहा है कि वे कुम्भकर्णी निद्रा में मगन हैं।
विकास मरकाम ने कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस के जनघोषणा पत्र में वन अधिकार पूर्णतः लागू करने की बात कही गई थी। इसके तहत वनाधिकार के सभी निरस्त आवेदनों पर पुनः सुनवाई करते हुए सभी को व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र प्रदान करने की बात कही गई थी, परन्तु धरातल में स्थिति बिल्कुल अलग है। वनाधिकार पत्र प्रदान करने की दिशा में शासन स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इसी प्रकार समर्थन मूल्य पर लघु वनोपज की खरीदी करने की बात कही गई थी, परंतु समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिये शासन ने अभी तक कोई नीति नहीं बनाई है और ना ही इस बाबत अधिकारियों को कोई निर्देश दिया गया है।
कांग्रेस ने अपने जनघोषणा पत्र में पांचवी अनुसूची क्षेत्र में पेसा कानून पूर्णतः लागू करने की भी घोषणा किया था परंतु भूपेश बघेल सरकार के इन ढाई सालों में पेसा कानून का सर्वाधिक उल्लंघन हुआ है। कांग्रेस की इस सरकार में रेत जैसे गौण खनिज के प्रबंधन का अधिकार ग्रामसभा से छीनकर खनिज विभाग को दे दिया है। प्रदेश में इससे जनजाति क्षेत्रो में रेत माफिया पनप रहे हैं और भाजपा के जनप्रतिनिधि तक को जान से मारने के प्रयास जैसी बड़ी घटना भी घट चुकी है। इसी प्रकार छोटे कृषि कार्य जैसे फौती उठाना, नामांतरण-बटांकन , पहले ये सब कार्य ग्रामसभा की अनुमति से ग्राम पंचायत में ही पटवारी करते थे परंतु अब इन छोटे कामों को भी तहसीलदार को दे दिया गया है। यह पेसा कानून के उल्लंघन के साथ-साथ ग्रामसभा के अधिकारों का हनन है।
इसके अलावा प्रदेश में भूपेश बघेल की सरकार बनने के बाद से राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र समझे जाने वाले अति पिछड़ी जनजातियों के साथ-साथ आदिवासी समाज पर प्रताड़ना व दुष्कर्म की घटनाओं पर भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। आदिवासी वर्ग के शासकीय कर्मचारियों के पदोन्नति पर प्रदेश के कांग्रेस सरकार के गलत निर्णयों के कारण रोक लगी हुई है। शासकीय कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। इसी प्रकार सरकार में आते ही 100 दिन के भीतर फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारकों पर कड़ी कार्यवाही करते हुये उन्हें तत्काल बर्खास्त की बात करने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अब इस मामले में चुप्पी साधे हुये हैं।
ढाई साल के अपने कार्यकाल में भूपेश बघेल की सरकार ने आदिवासी वर्ग के लिये कुछ नहीं किया है। इससे पता चलता है कि भूपेश बघेल और कांग्रेस की प्राथमिकता में आदिवासी कहीं नहीं हैं इसीलिए सत्तापक्ष के 30 आदिवासी विधायकों को जगाने हेतु भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा कल पूरे प्रदेश में इन विधायकों के निवास के सामने बड़ा प्रदर्शन करेगी। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष स्वयं रायपुर में आदिम जाति कल्याण और शिक्षा मंत्री प्रेमसाय टेकाम के बंगले के सामने, मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद कमलभान सिंह अम्बिकापुर, मोर्चा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद दिनेश कश्यप बस्तर, मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक ब्रम्हानंद नेताम कांकेर, प्रदेश महामंत्री सत्यनारायण सिंह सूरजपुर, प्रदेश महामंत्री नंदलाल मुड़ामी दंतेवाड़ा, प्रदेश उपाध्यक्ष रामलखन पैंकरा सरगुजा, प्रदेश उपाध्यक्ष वेदप्रकाश भगत जशपुर, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ देवेंद्र माहला बालोद, प्रदेश मंत्री खूबलाल ध्रुव नगरी, प्रदेश मंत्री अनुज एक्का सीतापुर एयर राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य श्रीकांत सोमावार रायगढ़ में इस प्रदर्शन में शामिल होंगे।
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