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वन मंत्री छत्तीसगढ़ शासन रायपुर को 180 उपवनक्षेत्र पाल प्रतिनुक्ति संविदा के नियमित पदों में परिवर्तन ना किये जाने के सम्बंध में ज्ञापन सौंपा गया

इस अवसर पर प्रमुख रूप से मूलचन्द शर्मा ,अखंड तिवारी, विनोद मिश्रा ,अजीत दुबे एवम पदाधिकारी गण उपस्थित थे।

रायपुर cg24आजतक :- विषयातर्गत संदर्मित पत्र द्वारा प्रबंध संचालक, छ.ग.राज्य लघुवनोपज संघ के पत्र कमाक,/ mfp/ 01/ 01-vii2020/स्थापना-15 // 2020 / 12044, दिनांक 05.12.2020 के प्रेषित प्रस्ताव में उललेखित तथ्य ‘उपवनक्षेत्रपालों की प्रतिनियुक्ति पर पदस्थिति अवधि ०6 माह के लिये होने के कारण संघ से संबंधी कार्य की वारीकियों को जब तक के पूरी तरह स्रमझ पाते है. उनके स्थान पर अन्य उपक्‍नक्षेत्रपाल की परदस्‍्थापना हो जाती है जिससे संघ के उद्देश्य अनुरूप लघ॒वनोपज क्रय संबंधी कार्य के समस्त कार्य के संचालन एवं प्रशासकीय /नियत्रण में वाधा पहुचती हैं” से सहमत होते हुए संघ कार्यालय हेतु सघ के सेटअप के पदस्थापना में स्वीकृत उपवनक्षेत्रपाल के 180 प्रतिनियुक्ति के पदों की सविदा के पदों में परिवर्तन हेतु प्रस्ताव पर विभाग की सहमति दी गई है।

अवगत होना चाहेंगे कि छ.ग.राज्य के अस्तित्व में आने के पश्चात्‌ वर्तमान में लागू प्रावधान अनुसार सघ कार्यालय मे प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं लेकर निरंतर रूप से लांभाश में कार्य सचालित होता आ रहा है, तथा सघ कार्यालय द्वारा प्रतिवर्ष लाभाश राशि शासन को सौंपी जाती है। संघ कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर सौंपे गये कर्मचारी पूर्ण रूप से विभाग क॑ कार्य से परिचित होते है एवं अनुभवी होते है, जो सघ के कार्य को भलीभाति सपादित करते है, एव समयावधि में पूर्ण करते है। विभाग के अनुभवी वन कर्मचारियों द्वारा सघ हेतु किये गये निष्ठापूर्वपफ कार्य के फलस्वरूप ही सघ प्रतिवर्ष अपना लक्ष्य पूर्ण कर पाता है।

विभाग में उपवनक्षेत्रपाल का पद पूर्ण रूप रो पदोन्नति पद है, तथा विभाग का कर्मचारी कई वर्षो की सेवा अवधि पूर्ण करने तथा पद रिक्त होने पर पदोन्‍नति का लाभ प्राप्त कर पाता है, जिस वजह से उक्त कर्मचारी की सघ हेतु स्वीकृत उपवक्षेत्रपाल के प्रतिनियुक्ति के पद पर जाने हेतु उत्सुकता रहते है।

परन्तु विमाग द्वारा उक्त संविदा की कार्यवाही कर वन कर्मचारिया की उपेक्षा करते हुए, कर्मचारी विरोधी कार्य किये जाने का निर्णय लिया गया है, जो पुर्ण रूप से वन कर्मचारियां क साथ प्क्ष्यात है छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ आपसे यह भी अनुरोध करता है कि संघ के सेटअप में उपवनक्षेत्रपाल के स्वीकत 180 पदों को कर्मचारी हित में सविदा से भर्ती न करन हुए, वन विभाग के मूल कर्मचारी में से _ही वरियता क्रम के आघार पर उनकी सहमत्ति प्राप्त कर उनकी सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर संघ कार्यालय को सौंपी जावे तथा चर्तगान में समयावधि हेतु लागू व्यवस्था को समाप्त करते हुए, पूर्व में लागू प्रावधान अनुसार संबंधित कर्मचारी की सहमत्ति लेते हुए उनकी सेवाएं संघ को सौंपी जाव॑ ₹., संघ कार्यालय में वरियता के आधार पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक बन बल प्रमुख द्वारा उन्क नसंवा एघ कार्यालय का सौंपी जाती है, परन्तु संघ कार्यालय मे उनकी सेवाएं विना किसी वरियता एवं समयादाध को ब्यान न न्‍्थत हुए. वापस नहीं किया जाता है, जो अनुचित है, एव प्रतिनियुक्ति पर भेजे गये कमचारियां का विभागीय कार्य भ पूर्द प्रप से मुक्त रखे जाने के स्पष्ट निर्देश हो, जिसका पालन किया जाना अनिवार्य किया जावें। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़ के पत्र कमांक/प्रशा अराज 1/ प्रतिनियुक्ति01 / 2016 ,/4000 दिनांक25,/05,“2016 के नियम को सिथिल करते हुये पदोन्‍नत्‌ कर्मचादी क प्रतिनियुक्ति हेतु सहमति लैकर लघु बनोपंज संघ में पदस्थ किया जावे। यहों यह भी उल्लेखनीय है कि संघ कार्यालय में संपादित समस्त कार्य व्यापार स्वरूप में संपादित होते है तथा संविदा में “* कर्मचारी के विरूद्ध किसी भी प्रकार की जवाबदेही निर्धारित्त किये जाने के शासन के को. दिशा निर्देश नहीं है तथा शासम के स्पष्ट निर्देश है कि संविदा में ” »क्त कर्मचारी को वित्तीय कार्य से ‘थक रखा जावे] ऐसे कई तथ्य है जो उक्त प्रस्ताव के विरोध में छग-वन कर्मचारी संघ आपके समझ दिचार करने हेतु प्रस्तुत कर सकता है। परन्तु शासन, प्रशासन एवं संघ द्वारा स्पष्ट किये गये तथ्यों को दर किनार करते हुए, संघ कार्यालय हेतु प्रतिनियुक्ति के स्वीकृत 180 पदों को सविदा से भरे जाने पर सहमति दी जाता है, तो सहमती पत्र में इस वात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जावें कि वन विभाग के किसी भी स्तर के कर्मचारी द्वारा कार्यालय के कार्य को करने हेतु बाध्य नहीं होगा, तथा उच्च अधिकारी द्वारा संघ के कार्य करवाये जाने हेतु दवाब नहीं बनाएगा तथा संघ कार्यालय के कार्य हेतु पृथक से कार्य स्थल एवं सेटअप की व्यवस्था की जावें। अतः छत्तीसगढ वन कर्मचारी संघ उक्त प्रस्ताव का कड़ा विरोध करता है तथा छ.ग.वन कर्मचारी संघ ब्वारा उपरोक्त उल्लेखित तथ्यों पर गहनपूर्वक विचार न करते हुए शासन एवं प्रशासन अवाछित निर्णय लिये जाने की स्थिति में बिना किसी पूर्व सूचना के मुख्यालय एवं संघ मुख्यालय कार्यालय का घेराव कर अपना कड़ा विरोध प्रदर्शन करेगा एवं अपने अधिकारों को सुरक्षित रखने हेतु माननीय न्यायालय की शरण में जाने हे बाध्य होगा, जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी शासन एवं प्रशासन की होगी

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