Cg24आजतक :- बालोद- छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण विभाग रायपुर की ओर से सजायाफ्ता बंदियों की रिहाई के लिए उन्मुक्त अभियान शुरू किया गया है , जिसके अंतर्गत दोष सिद्ध सजायाफ्ता बंदियों को रिहा किया जाएगा जो राज्य शासन द्वारा बनाए गए नीति के अनुसार समय पूर्व रिहाई हेतु पात्र हैं। यह अभियान माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा एस एल पी प्रकरण क्रमांक 529/ 21 पक्षकार सोनाधर विरुद्ध छ. ग. राज्य में दिए गए निर्देश के आधार पर प्रारंभ किया गया है। माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा छत्तीसगढ़ ,उत्तर प्रदेश एवं बिहार राज्य को यह दायित्व सौंपा गया है कि वे 1 अगस्त 2021 से पायलट प्रोजेक्ट को लागू कर पात्र सजायाफ्ता बंदियों को रिहा किए जाने बाबत आवश्यक कार्यवाही करना सुनिश्चित करेंगे । यह अभियान 4 चरणों में संचालित होगा पहले चरण में पात्र दोष सिद्ध बंदियो की पहचान करते हुए उनकी ओर से आवेदन प्रस्तुत कराकर एवं आवश्यक दस्तावेज संकलित कर उन्हें रिहा किए जाने बाबत कार्यवाही की जावेगी । यदि किसी पात्र बंदी का आवेदन निरस्त किया जाता है तब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा ऐसे बंदियों की ओर से विधिक सहायता उपलब्ध कराकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी । छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव श्री सिद्धार्थ अग्रवाल के द्वारा बताया गया कि माननीय न्यायमूर्ति श्री प्रशांत कुमार मिश्रा कार्यपालक अध्यक्ष, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के द्वारा इस अभियान की बारीकी से निगरानी की जा रही है एवं इस बाबत राज्य के समस्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष / जिला न्यायाधीश का आदेश दिया गया है कि वे जेल प्रशासन की आवश्यक मदद करें । इसके पूर्व माननीय न्यायमूर्ति श्री प्रशांत कुमार मिश्रा कार्यपालक अध्यक्ष राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा रिट पिटिशन क्रमांक 78 / 17 पक्षकार अमरनाथ विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत जिला न्यायालयों में पदस्थ न्यायिक अधिकारियों को पूर्व से ही यह निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे दोष सिद्ध बंदियों को धारा 432(2) दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत रिहा किए जाने के संबंध में अपना अभिमत दिए जाने की कार्यवाही 3 माह के भीतर पूर्ण करेंगे।
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