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जगत का सब ऐश्वर्य भोगने को मिल जाय परन्तु अपने आत्मा-परमात्मा का ज्ञान नहीं मिला तो अंत में इस जीवात्मा का सर्वस्व छिन जाता है:-संत रामबालकदास जी

जामडीधाम cg24आजतक :-
पाटेश्वर धाम के द्वारा आयोजित ऑनलाइन सत्संग जिसमें प्रतिदिन संत श्री राम बालक दास जी का सानिध्य भक्तों को मिलता है आज की परिचर्चा में अद्भुत ज्ञान की बरसात हुई बाबा जी कहते हैं जिनके पास आत्मज्ञान नहीं है और दूसरा भले सब कुछ हो परन्तु वह सब नश्वर है । उसका शरीर भी नश्वर है ।
योग वशिष्ठ में वशिष्ठ जी कहते हैः
“किसी को स्वर्ग का ऐश्वर्य मिले और आत्मज्ञान न मिले तो वह आदमी अभागा है । बाहर का ऐश्वर्य मिले चाहे न मिले, अपितु ऐसी कोई कठिनाई हो कि चंडाल के घर की भिक्षा ठीकरे में खाकर जीना पड़े फिर भी जहाँ आत्मज्ञान मिलता हो उसी देश में रहना चाहिए, उसी वातावरण में अपने चित्त को परमात्मा में लगाना चाहिए । आत्मज्ञान में तत्पर मनुष्य ही अपने आपका मित्र है । जो अपना उद्धार करने के रास्ते नहीं चलता वह मनुष्य शरीर में दो पैर है पर चार पैर वाले पशु की तरह उसका जीवन है
वशिष्ठजी कहते हैं: “जो ज्ञानवान ऋषि, महर्षि हैं, भले उनके जीवन में कई विघ्न-बाधाएँ भी आती हैं परंतु उनका चित्त सदा अपने आत्म-अभ्यास से सुसज्ज होता है ।”
भगवान राम ने बाल्यकाल से संध्या, प्राणायाम ध्यान आदि किया था, और सोलह साल की उम्र में तीर्थयात्रा करने निकल गये थे । साल भर तीर्थयात्रा करते संसार की स्थिति का गहन अध्ययन करते हुए इस नतीजे पर आये कि बड़े-बड़े महल खण्डहर हो जाते हैं, बड़े-बड़े नाले नदियाँ रुख बदल देती हैं । बस्ती शमशान हो जाती है और शमशान बस्ती में बदल जाता है। यह सब संसार की नश्वरता देखकर भगवान रामजी को वैराग्य हुआ । संसार के विकारी जीवन से, विकारी सुख से उन्हे वैराग्य हुआ । वे वशिष्ठजी मुनि का ज्ञान सुनते थे । ज्ञान सुनते-सुनते उसमें तल्लीन हो जाते थे । रात भर आत्मज्ञान के विचारों में जागते रहते थे । कभी घड़ी भर सोते थे और फिर झट से ब्राह्ममुहूर्त में उठ जाते थे । श्रीरामचन्द्रजी ने थोड़े ही समय में अपने सदगुरु के वचनों का साक्षात्कार कर लिया ।
इस तरह आज का सत्संग पूर्ण हुआ

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