बालोद जिला में धारा 144 लागू होने वा कोरोणा संक्रमण को देखते हुए 15 जनवरी को होने वाले दुधली के मंडई को रद्द किया गया है।
Cg 24 आज तक बोधन भट्ट बालोद की खास रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ वैसे तो अपने पारंपरिक वेशभूषा व तीज त्योहार के नाम से जाना पहचाना जाता है जहा किसान अपनी पुरानी परंपरा देवी देवता की पूजा अर्चना के अनुसार समय-समय पर गांव में तीज त्यौहार व धान की मिजाई, कटाई के बाद मंडई मेला का आयोजन किया जाता है और अपने परिजनों व चित परिचितों को निमंत्रण देखकर उन्हें बुलाकर खुशी जाहिर करते हैं
मगर मालीघोरी मंडई का एक खास महत्व है आपको बता दें कि 12 गांव के बर गहिन दाई आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर का द्वार विशेष रूप से महिलाओं के लिए मंडई के ही दिन व गांव में 3 साल में बोए जाने वाली जोत जवारा विसर्जन के दिन ही खोला जाता है जिसका महिलाओं को बेसब्री से इंतजार रहता है इस दिन माता बहने सुबह से नित्य कर्म करके पूजा की थाली सजा कर माता के दर्शन के लिए लंबी लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतजार करती हैं 1दिन मंडई के दिन विशेष छूट रहती है बाकी समय पूर्णता वर्जित रहती है
गांव के बईगा शिवप्रसाद वा ग्रामीण राजकुमार प्रभाकर ,गंगाराम देशमुख ,स्वरूप धनकर , मेडसिंह देशमुख, देवनाथ देशमुख, अमरू राम उर्वसा आदि लोगों ने बताया कि पुरानी मान्यता अनुसार जमीदार रजवाड़ा के जमाने से यह परंपरा चली आ रही है जिसमें आसपास के गांव के लोग अपने अपने गांव से डांग डोरी व मंडई सजाकर लाते है और माली घोरी का मडाई एक साथ मनाते हैं आज भी यह परंपरा कायम है पर इस साल जिला प्रशासन के निर्देशानुसार मंडई को रद्द किया गया है गांव की पंच देव वा बैगा के द्वारा पूजा अर्चना की जाएगी
मिली जानकारी के अनुसार
सन 1963 में खरखरा नहर नाली का निर्माण किया जा रहा था तब वहां से भिलाई स्टील प्लांट को पानी देने के लिए नाहर नाली का निर्माण किया गया जो दूधली मालीघोरी होकर गुजरती है पर नाली निर्माण के रास्ते में मंदिर आ रही थी जिसे इंजीनियर के द्वारा गांव वालों को तोड़ने कहा गया और मंदिर को दूसरी जगह बनाने कहा गया तो गांव वाले नहीं माने और उसे बहुत समझाने का प्रयास भी किया गया पर इंजीनियर अपनी हठधर्मिता पर अड़ा रहा और खुद कुदाली उठा कर मंदिर तोड़ने लग गए तब उनके ऊपर कुछ घटना घटी तब दूसरे इंजीनियर व शासन को गांव वालों ने समझा-बुझाकर मंदिर के किनारे से नाली निर्माण कराया गया आज ही मान्यता है कि कोई श्रद्धालु मां के दरबार में सच्चे मन से जोड़ा नारियल बांधते,या घोड़ा चढ़ाते हैं तो उनकी मनोकामना अवश्य सफल होती है
12 गांव के लोग एक साथ मनाते हैं दूधली का मंडाई
बालोद जिले से 8 km दूर राजनांदगांव मुख्य मार्ग पर ग्राम मालीघोरी का मंडई काफी मशहूर है जिसे देखने के लिए दर्शक काफी संख्या में दूर दूर से यहां पहुंचते हैं
दो साल के कोरोना संक्रमण वा डाउन की मार झेल रहे एक आम आदमी से लेकर छोटे बड़े व्यापारी लोगो के सामने फिर से रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो रही है मड़ाई मेले में छोटे-मोटे दुकान लगाकर यह लोग अपनी परिवार चलाते हैं एक बार फिर से इन लोगों के सामने संकट के बादल नजर आ रहे हैं
आसपास में बड़ा मंडाई होने के कारण दूर-दूर से व्यापारी लोग 1 सप्ताह पहले आकर अपनी जगह चयन का दुकान लगाते हैं पर इस साल सभी लोगो को जानकारी दी गई है कि बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए गांव में बैठक कर मंडई को कैंसिल किया गया है
दुधली के युवा सरपंच मोहम्मद फिरोज तिगाला ने सभी व्यापारी भाइयों को निवेदन किया है की कोई भी व्यापारी भाई इस साल दुकान ना लगाएं क्योंकि जिला प्रशासन के निर्देशानुसार दुधली मंडई को रद्द किया गया है
राजकुमार प्रभाकर जनपद सदस्य डौंडीलोहारा
देवी मंडई होने के कारण गांव के बैगा वा पंच देव के द्वारा माता की पूजा अर्चना की जाएगी महिलाओं के लिए मा के दर्शन के लिए द्वार खोला जाएगा जिसमें कोरोना गाइडलाइन के नियमों का पालन किया जाएगा सभी माता बहने बारी-बारी से दर्शन कर सकती हैं।
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