पूर्व में मिले अधिकार बिना विवाद वाले नामान्तरण प्रमाणीकरण पहले ग्राम पंचायतों में कर दिए जाते थे जिससे किसानों को सुविधा होती थी फावती बंटवारा भी ग्राम पंचायत में हो जाते थे
पर आज कांग्रेसी सरकार ने भ्रष्टाचार को बढ़ाने के लिए किसानों को तहसील तक बुलाया जाता है ग्राम पंचायत से उनका अधिकार छीना गया
00आज ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं 00मुख्यमंत्री तो पंचायती राज सम्मेलन में तमाम प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधियों को बुलाकर लोकलुभावन घोषणा कर वाहवाही तो लूट लेते हैं
पर जमीनी स्तर पर इसका कोई पालन नहीं हो रहा है जिसके कारण पंचायत प्रतिनिधि अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है परेशान हो रहे हैं
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रत्येक ग्राम पंचायतों को पचास लाख तक के काम करने का अधिकार होगा पर धरातल में जब हम देखें इस बालोद जिला की बात करें पचास हजार तक का काम भी सरपंच द्वारा ना करा कर कांग्रेस के ठेकेदारों द्वारा कराया जा रहा है। जो अत्यंत निंदनीय है जब से कांग्रेस की सरकार बनी है तब से विकास मूलक कार्यों को ग्रहण लग गया है
ग्राम पंचायतों में किसी भी प्रकार के विकास कार्य नहीं हो रहे हैं
पूर्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार में ग्रामीण समग्र विकास योजना संचालित थी जिसे कांग्रेस गवर्नमेंट आते ही बंद कर दिया गया जिसके कारण से ग्रामीण विकास रुक सा गया है
जिस वादे के साथ ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि जीत कर आए थे उसे पूरा करने में वह असमर्थ हो रहे हैं क्योंकि राज्य शासन ग्राम पंचायत जनपद पंचायत एवं जिला पंचायतों के लिए व्यवस्थित राशि नहीं दे पा रही है।
वह तो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का शुक्र है 15वें वित्त आयोग का पैसा इस बार जिला जनपद एवं ग्राम पंचायतों में दिया गया
जिसके कारण से ग्राम पंचायत जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत को कुछ राशि मिल पाया जिससे जिला पंचायत सदस्य जनपद सदस्य और सरपंचों की इज्जत बच गई है
अन्यथा इस सरकार में पंचायत जनप्रतिनिधियों को जनता को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ते आज ग्राम पंचायत स्तर पर जितने भी कार्य चल रहे हैं
वह केंद्र सरकार की देन है अन्यथा राज्य शासन के पास फूटी कौड़ी ग्राम पंचायतों के लिए नहीं है।
ना ही इनके पास कोई योजना है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास किया जा सके
भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है कांग्रेस सरकार आने के पूर्व मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किसी भी ग्राम पंचायत को ₹1 भी कमीशन किसी को नहीं देना पड़ता था
प्रस्ताव अनुसार ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कार्य कराए जाते थे
लेकिन कांग्रेस सरकार में आलम यह है कि जब तक आप मनरेगा जैसे कार्यों में भी कमीशन नहीं देंगे तब तक आप के ग्राम पंचायत में कार्य नहीं होगा पंचायत स्तर पर विधायकों के प्रतिनिधि कांग्रेस के जनप्रतिनिधि सरपंचों के पास जाकर उनके ग्राम पंचायतों में हो रहे कुछ कामों में कमीशन की मांग करते हैं जो दुर्भाग्य जनक है
कांग्रेस की इन कृत्यों से त्रस्त हो आज विवश होकर डौंडीलोहारा विधानसभा के सरपंचों ने डोंडी में भी अपना आक्रोश व्यक्त किया था
आज डौंडीलोहारा में भी धरना देकर प्रशासकीय अधिकारियों को अवगत कराया कि इस तरीके की कार्य इस तरीके के भ्रष्टाचार को अगर अंजाम दिया गया तो आने वाले समय में उग्र आंदोलन किया जाएगा जिसको समर्थन बालोद जिला पंचायत के प्रथम अध्यक्ष देवलाल ठाकुर ने भी किया और कहां बोलना और करना दोनों अलग अलग बात है अगर मुख्यमंत्री ने कहा है पचास लाख तक के कार्य ग्राम पंचायत करेगी तो यह कार्य होना चाहिए
लेकिन हम देख रहे हैं कि ग्राम पंचायतों में सरपंच पचास हजार का भी काम नहीं करा पा रहे हैं।।यह सारे काम कांग्रेस के विधायकों के इशारे पर ठेकेदारों को दिया जा रहे हैं जो अत्यंत ही निंदनीय है अगर ऐसे ही हालात रहेंगे तो आने वाले समय में तमाम ग्राम पंचायतों की समस्याओं को लेकर जिला स्तरीय आंदोलन होगा
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