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रिपोर्टर,, बोधन भट्ट बालोद
एंकर,,,बालोद जिले में एक ऎसा मंदिर है जहां देवी देवताओं के साथ स्वामी भक्त कुत्ते के भी पूजा की जाती है जिसका नाम इतिहास के पन्नों पर भी अंकित है
जिला मुख्यालय बालोद से महज 8 किलोमीटर दूर ग्राम मालीघोरी खपरी में कुकुर देव के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर जहां सावन,,नवरात्रि ,महाशिवरात्रि पर्व पर लोग भगवान शिव के साथ कुत्ते की समाधि की पूजा करते है
वास्तव में यह एक स्मृति स्मारक है जो भगवान शिव को समर्पित है मंदिर के गर्भ गृह में जलधारी योनिपीट शिवलिंग स्थापित है मंदिर का बाहरी भाग में नागो का अंकन है यह पूर्व मुखी मंदिर है इस मंदिर का निर्माण फनी नागवंशी शासकों द्वारा 14-15 शताब्दी ईस्वी के मध्य कराया गया था मंदिर निर्माण के संबंध में कुछ रोचक किवदंती प्रचलित है यह मंदिर साहूकार कर्ज देने वाले बंजारा के द्वारा उसके स्वामी भक्त कुत्ते की स्मृति कुत्ते की दफन स्थल पर बनाया गया है
जिसकी लोग आज भी वफादारी के नाम से पूजा करते हैं मंदिर के गर्भगृह में योनि पिट है जहा पर लोग सावन व महाशिवरात्रि पर्व में जल चढ़ाकर पूजा अर्चना करते हैं मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा भी है जो जमीन से निकली हुई है जो दिन प्रतिदिन बढ़ रही है


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