

बालोद :- आदिवासी नेताओं के मान सम्मान को लेकर छिड़े बहस ने बालोद जिले के राजनीतिक पारा को कुछ समय के लिए गरम कर दिया है। क्या सचमुच में आदिवासी समाज का अपमान कांग्रेस के नेताओं व पार्टी संगठन ने किया है। या ये सिर्फ समाज को एक बड़ा वोट बैंक मानकर सिर्फ बयानबाजी का ही हिस्सा है। क्या विष्णुदेव साय के सुशासन की सरकार जैसा कि भाजपाई कहते हैं। की आदिवासी समाज को सम्मान मिल रहा है। अब अगर हम इसको चुनावी नफा नुकसान के तराजू में तौले खासकर हम बालोद जिले के तीन विधानसभा चुनाव क्षेत्रों गुण्डरदेही,संजारी बालोद,और अजजा सुरक्षित सीट डौंडीलोहारा में तो इन चुनावों में सुशासन देने वाली पार्टी की लगातार तीन बार हार हुई है। वह भी वोटो के बड़े अंतराल से तो यह प्रश्न बनता है कि आदिवासी समाज कांग्रेस पार्टी से नाराज है कि वर्तमान सत्ताधारी भाजपा पार्टी से नाराज हैं ।
विधानसभा चुनाव में मिल रहे जीत से फायदा तो कांग्रेस उठा रही है। लेकिन पार्टी प्रवक्ता के बयानों से लग रहा है कि आदिवासी नेताओं का अपमान कांग्रेस कर रही तो फिर भाजपा को इस समाज से फायदा क्यों नहीं मिल रहा है। या फिर सच्चाई कुछ और है। ऐसा तो नहीं कि भाजपा जमीनी सच्चाई को स्वीकार नहीं कर सिर्फ बयानबाजी ही कर रहे हैं। जबकि समाज का फायदा कांग्रेस को ही मिल रहा है। जो आंकड़े भी बता रहे हैं।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों समय समय पर बदलते घटना क्रम व बयानबाजी ने कांग्रेस व भाजपा के बड़े नेताओं के साथ साथ संगठन नेताओं को भी इस विषय पर बोलने को मजबूर कर दिया है। वैसे तो राजनीति में पक्ष व विपक्ष के बीच राजनीतिक स्तर पर रस्साकस्सी चलता ही है। लेकिन यह बयानबाजी ऐसे समय पर आया है। जब कांग्रेस के बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ed के निशाने पर है।वहीं उनके पुत्र वर्तमान में जेल में है।
अब आखिर विषय क्या है इस पर नजर डाले तो हाल ही में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मंत्री व कद्दावर नेता रविन्द्र चौबे का वह बयान जिसमें उन्होंने बघेल को शेर कहते हुए यह कहा कि भूपेश बघेल को कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए उनमें दम है। की वो भाजपा के कुशासन के खिलाफ आक्रामक लड़ाई लड़ सकते हैं। इसी बयानबाजी ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया पूर्व मंत्री चौबे ने यह बातें किस आधार पर कही,क्या कोई राजनीतिक घटनाक्रम का पूर्व इशारा है।यह बातें तो शोध का चर्चा का हो सकता है। लेकिन इस बयान से जहा वर्तमान छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का भी बयान सामने आया की पूर्व मंत्री रविन्द्र चौबे बड़े नेता हैं महाज्ञानी है। वे किस आधार पर यह बातें कह रहे हैं।वो ही जानते होंगे।
लेकिन कांग्रेस नेताओं के बयान को लपककर बीजेपी ने इसे आदिवासी अस्मिता से जोड़कर एक राजनीतिक बयान पार्टी प्रवक्ता ने जारी कर दिया कि कांग्रेस ने कभी भी आदिवासी नेतृत्व पर भरोसा नहीं किया हैं। पार्टी प्रवक्ता देवलाल ठाकुर के नाम से जारी यह बयान भी काफी चिंतन योग्य है। बयान में जहां इस मामले को लेकर पार्टी प्रवक्ता के जारी बयान में कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व अजित जोगी,पूर्व मंत्री कवासी लखमा, व वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के नाम का उल्लेख कर कांग्रेस के द्वारा इन्हीं आदिवासी नेताओं के खिलाफ आदिवासी विरोधी कांग्रेस का चेहरा सामने आने की बात कहा गया है। कांग्रेस में ऐसे जनप्रतिनिधि शोषित होते रहे हैं। ऐसे नेताओं को अपमानित करने में कांग्रेस कभी पीछे नहीं रहा है ।ऐसे बातों का उल्लेख खबरों में किया गया हैं।
दूसरी तरफ देखे तो इस सरकार में छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्व अजित जोगी जी के देहांत के बाद उनकी मूर्ति को चौक में लगाने उनके बेटे संघर्ष करते देखे गए हैं। वहीं आबकारी घोटाला में जेल में बंद कवासी लखमा को भी घोटालेबाज व निरक्षर कहा गया है। अब ऐसे बयानों व कार्यवाही को आदिवासी सम्मान से देखे की इसे भी सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी ही माने यह जनता को समझना है। लेकिन एक बात तो साफ है कि राजनीति में समय के साथ बयान व बयान के मायने बदलते रहते हैं। कभी भाजपा को इन नेताओं की कार्यशैली में भ्रष्टाचार नजर आता है।आदिवासी होने न होने की लड़ाई सामने आता है। तो शराब घोटाले के बड़े आरोपी नजर आते हैं। घोटालेबाज कहे जाते हैं ।वहीं समय के हिसाब से इन्हीं आदिवासी नेताओं की अस्मिता की भी चिंता ऐसे पार्टी नेताओं को होता है।
कहने का मतलब है कि सामान्य व्यक्ति के समझ में ऐसे राजनीतिक बयान समझ नहीं आयेगा कि कांग्रेस में अपमान हो रहा है कि भाजपा ऐसे आदिवासी नेता को निरक्षर बोल कर सम्मान कर रही हैं। या उनके सम्मान के लिए बयानबाजी कर रही है एक घोटालेबाज की अस्मिता व सम्मान की चिंता कर रही है। खैर जो भी हो क्षेत्र व प्रदेश में चलते राजनीतिक बयानबाजी से लोगों को खबरें तो मिल ही जा रहा है। वहीं ऐसे बयानबाजी से समझदार जनता समझ कर अपना गणित तो लगा ही रहा है।
प्रदेश प्रवक्ता भाजपा के जारी बयान पर बालोद जिला कांग्रेस नेता रत्तीराम कोसमा ने भी कहा है कि
बयान :- आदिवासी नेताओं का सम्मान कांग्रेस ने हमेशा से किया हैं, आज पार्टी की कमान भी प्रदेश में आदिवासी नेता के हाथों में है।एक आदिवासी निरक्षर व्यक्ति को मंत्री बनाने का काम भी कांग्रेस ने किया है। मुख्यमंत्री भी कांग्रेस ने ही बनाया था,रही बात पार्टी प्रवक्ता देवलाल ठाकुर की तो कांग्रेस ने उसका भी सम्मान जिला पंचायत अध्यक्ष बालोद बनाकर किया था जबकि उनमें भी कुछ काबिलियत नहीं थी, अपने फायदे के लिए कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए देवलाल ठाकुर इस प्रकार की बयानबाजी सिर्फ बड़े नेताओं के सामने अपना नंबर बढ़ाने के लिए करते रहते हैं। क्षेत्र की जनता इनके वादों व बातों से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। इनकी बातों को कोई भी गंभीरता से नही लेते – रत्तीराम कोसमा – महामंत्री प्रदेश आदिवासी कांग्रेस, जिला महामंत्री बालोद जिला कांग्रेस
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