
रायपुर
13 साल से असहनीय दर्द और गंभीर बीमारी से जूझ रहे हरीश राणा ने आखिरकार अस्पताल में दम तोड़ दिया। उनकी मौत ने जहां एक ओर परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया, वहीं यह मामला मानवीय संवेदनाओं और मजबूरियों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर गया है।
बताया जा रहा है कि हरीश राणा लंबे समय से ऐसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, जिसमें उन्हें लगातार असहनीय दर्द सहना पड़ता था। इलाज के लिए परिवार ने हर संभव प्रयास किए, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। आर्थिक स्थिति भी धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई।
मां-बाप की सबसे बड़ी मजबूरी
हरीश की हालत देखकर उनके माता-पिता मानसिक रूप से टूट चुके थे। बेटे को तड़पता देख उन्होंने कलेजे पर पत्थर रखकर भगवान से उसकी मुक्ति की प्रार्थना करनी शुरू कर दी थी। उनका कहना था कि वे अपने बेटे को इस तरह दर्द में नहीं देख सकते।
अस्पताल में ली अंतिम सांस
लगातार बिगड़ती हालत के बीच हरीश को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
इलाके में शोक की लहर
हरीश की मौत की खबर फैलते ही इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों ने इसे एक दर्दनाक लेकिन “मुक्ति” जैसा अंत बताया। कई लोगों का कहना है कि यह घटना उन परिवारों की पीड़ा को सामने लाती है, जो लंबे समय तक गंभीर बीमारियों से जूझते हैं।
संवेदनाओं से जुड़ा सवाल
यह घटना फिर एक बार इस सवाल को उठाती है कि क्या असहनीय पीड़ा में जी रहे मरीजों के लिए कोई अलग व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि उन्हें और उनके परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

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