
cg24 आजतक
राज्य में कार्यरत समस्त मo गांo नरेगा कर्मचारी विगत 15 वर्षों से मंत्रालय से ग्राम पंचायत स्तर पर सहायक परियोजना अधिकारी,तकनीकी समन्वयक,शिकायत समन्वयक, कार्यक्रम अधिकारी, तकनीकी सहायक ,प्रोग्रामर, लेखपाल, सहायक ग्रेड 3,ऑपरेटर एवम रोजगार सहायक आदि पदों पर कार्यरत है जो छत्तीसगढ़ प्रदेश को विगत कई वर्षों से मo गांo नरेगा योजना में राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार दिलाने में अहम योगदान रहा है इन सबके बावजूद मo गांo नरेगा में आज तक संविदा अनियमित कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहे हैं ।प्रतिवर्ष सेवा वृद्धि गोपनीय प्रतिवेदन के आधार पर किया जाता है जिसके कारण उच्चाधिकारी पर हमेशा कर्मचारियों पर भयदोहन कर अकारण मानसिक प्रताड़ना जैसे आरोप लगते रहे है और इसी कारण प्रति वर्ष कई कर्मचारी का सेवावृद्धि नही किया जाता और जो वर्षों से काम कर रहे है उनको नौकरी से हटा दिया जाता है। यह केस सिर्फ मo गांo नरेगा के कर्मचारी मे ज्यादा होता है।
यह महत्वाकांक्षी नरेगा योजना 2 फरवरी 2006 को आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले से प्रारम्भ हुआ था जिसे 2 अक्टूबर 2010 को नरेगा का नाम बदलकर महात्मा गांधी नरेगा किया गया। यह योजना ग्रामीण क्षेत्र के प्रति परिवार को 100 दिन का रोजगार सुरक्षा मुहैया कराने वाला वृहद योजना रहा है। इस योजना से ग्रामीण परिवार का आय में एवम जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्टर से लेकर आवागमन और विशेषकर प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन(NHM)के कार्य से जल संवर्धन एवम जल संरक्षण में रामबाण साबित हुआ है। अभिशरण के माध्यम ग्रामीण क्षेत्र के लोगो का आजीविका का विकास हुआ है और आज भी लाभ ले रहे है। इन सबका जमीनी स्तर पर क्रियान्वन संविदा कर्मचारी अधिकारी करते आ रहे है । योजना का सफलता एवम अहमियत तब देखने को मिला जब इस वर्ष कोरोना(कोविड 19) जैसे वैश्विक महामारी में पूरा विश्व आर्थिक मंदी से गुजर रहा है तो छत्तीसगढ़ सहित पूरे भारत वर्ष में ग्रामीण परिवार को मंदी का प्रभाव नही पड़ा। छत्तीसगढ़ पूरे भारत वर्ष में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला राज्य में दूसरा स्थान रहा है ।
आज मo गांo नरेगा में 150 दिन एवम FRA परिवार को 200 दिन का काम मिलने का गारंटी है।
इन सबके बावजूद आज मo गांo नरेगा में कार्यरत कर्मी की नौकरी की कोई गारंटी नही है, कार्यरत कर्मचारी मानसिक रूप से हमेशा दबाव में एवम अपने नौकरी की असुरक्षा और भविष्य अन्धकार में जीवन यापन कर रहे है । छत्तीसगढ़ में इस योजना अंतर्गत ग्राम रोजगार सहायक 10500 एवम 5000 मंत्रालय, जिला व जनपद स्तर मिलाकर राज्य में लगभग 15500 के कर्मी है इन कर्मी में 50प्रतिशत से ज्यादा लोग की उम्र 40 वर्ष से ज्यादा हो गया जो 8 से 15 साल से कार्य कर रहे है।
वर्तमान राज्य सरकार भूपेश बघेल के अगुवाई में जन घोषणा पत्र में वादा किया गया था कि 10 दिनों के भीतर संविदा अनियमित कर्मचारियों को नियमितीकरण का उपहार देंगे किंतु आज प्रदेश सरकार को 27 माह से अधिक समय हो चुका फिर भी वादा धरा का धरा है जिसके कारण हजारों संविदा मनरेगा अधिकारी कर्मचारियों में असंतोष एवम रोष व्याप्त है । आज प्रदेश में सचिव एवं रोजगार सहायक संघ विगत 20 दिनों से हड़ताल में है इसी क्रम में आज छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ 2 दिनों का सांकेतिक हड़ताल पर जा चुके है 20 जनवरी को जनपद स्तर में धरना प्रदर्शन किया गया एवं 21 जनवरी को रैली के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखेंगे।
मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन देंगे।
आन्दोलन कर्मी की प्रमुख मांग है
समस्त मनरेगा अधिकारी कर्मचारियों को 62 वर्ष की जॉब सुरक्षा करते हुए समान काम समान वेतन दिया जाए ।
पंचायत कर्मी नियमावली लागू करते हुए निलंबन का प्रावधान हो।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में रिक्त समकक्ष के पदों में मनरेगा अधिकारी कर्मचारियों को समायोजित किया जाये।
ग्राम रोजगार सहायक को ग्रेड पर निर्धारित करते हुए जॉब सुरक्षा प्रदान की जाये।
केंद्र सरकार म.गा.नरेगा के लिए लगभग 60000 करोड़ के आसपास बजट देता है उसमे छत्तीसगढ़ को प्राप्त आबंटन होता है विगत 5 वर्षों का बजट का आकलन करने से यह प्रमाणित होता है कि अगर छत्तीसगढ़ के समस्त मनरेगा अधिकारी कर्मचारी को नियमित किया जाता हैं तो राज्य सरकार पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त बोझ आर्थिक रूप से नहीं आएगा इसकी जानकारी पूर्व में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री टी. एस. सिंहदेव जी को ज्ञापन के माध्यम से दी जा चुकी है किंतु उनके सार्थक आश्वासन के बाद भी किसी प्रकार का सकारात्मक पहल नही हो सका।
छत्तीसगढ़ शासन 2 दिन के सांकेतिक हड़ताल उपरांत किसी प्रकार की सकारत्मक पहल नही करेगी तो अनिश्चित कालीन हड़ताल में जाने के लिये बाध्य होंगे ।
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