जब बालोद जिले के पालिका /नगर पंचायत के अध्यक्ष लाखो रुपये के कुर्सी,सेनिटाइजर मशीन, खेल सामग्री क्रय करते है। तो आज स्वाथ्य सुविधा के लिए भी सामुहिक निर्णय की आवश्यकता है। मगर अभी तक बालोद जिले के अंदर किसी ने भी इस विषय पर कदम नही बढ़ाया है।
प्रथम कोरोना काल मे सरकार ने जिस तेजी के साथ गरीब परिवारों की चिंता की थी उनके भोजन की व्यवस्था के लिए अनाज बैंक की स्थापना की वही जनप्रतिनिधियों को भी उनकी निधि से अनाज वितरण की छूट दिया था लेकिन इस बार इन विषयों पर किसी का ध्यान नही जा रहा है। बालोद जिले के नगर पालिका हो या नगर पंचायत सभी जनप्रतिनिधियों ने अनाज वितरण में लाखों रुपये खर्च कर दिए व हर रोज गरीब परिवारों को घर घर जाकर अनाज सब्जी मास्क वितरण करते नजर आ रहे थे। मगर गौर करने की बात यह है। कि इस बढ़ते कोरोना समय मे लॉक डाउन की समय सीमा बढ़ने के बाद भी इस जायज विषय पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही नही देखा जा रहा है।
जायज प्रश्न यह भी :-
क्या इस समय बालोद जिले के इन क्षेत्रो में जहां पूर्व में लाखों रुपये के अनाज गरीबो में बांटे गए आज के हालात में अब उन गरीबो की संख्या नही रह गया या गरीब परिवार नही रह गए ।
जिले में वर्तमान समय मे जब लाकडाऊन कि समय सीमा बढ़ा दिया गया है। नगर के जिम्मेदारों को स्वयं पूर्व की तरह आगे कदम बढ़ा कर इन परिवारों तक जाकर हालात की जानकारी लेना चाहिए क्योंकि इन जिम्मेदारों को पता है। अपने वार्डो की सच्चाई
जिला प्रशासन ने भी पूर्व में अनाज बैंक की स्थापना की व सैकड़ो गरीब परिवारों को सुखा राशन प्रदाय किया खासकर नगरीय इलाको में अनाज वितरण किया पर इस बार प्रशासन भी ” मौन “
आज कुछ जिम्मेदार युवाओं ने राज्य सरकार से जायज बातो को रखकर मांग किया कि नगरीय निकाय के जनप्रतिनिधियों को उनकी निधि से कोविड 19 के इलाज हेतु जायज सामग्री क्रय करने की छूट दिया जाए
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