ऐसा नही की इन दोनों दलों के स्थानीय नेताओं को संगठन के प्रमुखों के द्वारा कोई दिशा निर्देश नही दिया गया हो मगर बालोद जिला में इस संकट काल के समय मे जो प्रयास आमजनता के लिए किया जाना चाहिए वो होते नही दिख रहा है। और जो दिख रहा वो हमारे सामने है। सिर्फ और सिर्फ वेब दुनिया व शोशल मीडिया में एक दूसरे से आगे बढ़ने की रस्साकस्सी
बालोद :- कोरोना के महामारी व बढ़ते संक्रमण से जहां पूरा प्रदेश व जिला के आमजनता परेशान हो जिंदगी की लड़ाई लड़ रहा वही कुछ लोग अपनी जिंदगी ही हार गए व पीछे छोड़ गए रोते बिलखते परिजनों को यही हाल इन दिनों पूरे बालोद जिले में दिखाई दे रहा है। क्या बूढे क्या जवान इसकी चपेट में सभी आ रहे है। किसी का बाप तो किसी का बेटा किसी की पत्नी तो किसी का जवान भाई सभी इस कोरोना के महामारी में जिंदगी की जंग हार रहे है।
मगर इस महत्त्वपूर्ण विषयो से इतर जिले के अंदर दोनों राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस व भाजपा इन विषयों पर सिर्फ बयानबाजी करते दिखाई दे रहे। और आमजनता की लड़ाई की बात को लेकर जनता के बीच अपनी पार्टी व खुद की राजनीति चमकाने के लिए “फूल दो फूल लो” कि राजनीतिक खेल खेल रहे है।
जिले की राजनीति सत्ता चाहे विधायक हो,जिला पंचायत हो,पालिका हो बहुमत तो कांग्रेस के पास मौजूद है।मगर निकाय के जनप्रतिनिधियों को छोड़ दे तो अभी तक किसी भी जिला पंचायत के सदस्य को आमजनता को सहयोग व जमीन पर उतर कर कार्य करते नही देखा गया आखिर भविष्य में विधायक बनने का सपना देख रहे ऐसे नेताओं को आखिर इसी संकटग्रस्त जनता के बीच फिर से जाना होगा ,,तब क्या होगा ?
इन सब मुद्दों में जिले के दोनों दलों के नेताओ के कार्यक्रम व किये जा रहे उठापठक को समझने का प्रयास करे तो सभी केंद्रीय मुद्दों पर और राज्य के मुद्दों पर ज्यादा ही मेहनत कर रहे है। लेकिन जिस कर्मभूमि से व जिस मतदाता रूपी जनता से इनको राजसत्ता व सुख वैभव व नाम शौहरत प्राप्त होता है।उस स्थानीय जन्मभूमि पर रोते बिलखते इंसान कोई दवाई के लिए तो कोई भूख से वही कोई ऑक्सीजन से तड़प रहे आमजन के मुद्दे इन दोनों दलों से काफी दूर रह गए है। और अगर दिखाई दे रहा है। तो वह है। इन दोनों दलों का खेल वह भी “राजनीति, राजनीति का
अभी तक कोरोना के दूसरी लहर व बड़े संक्रमण पर दोनों राजनीतिक दलों के बीच से गरीब,बेसहारा,लाचार परिवार के भोजन की व्यवस्था करने,छोटे मध्यम परिवार को सुखा राशन देने ,मास्क वितरण करने जैसे जायज विषयो पर कोई भी कार्यक्रम नही आये है। और जो भी इन नेताओं के तरफ से आया वो है। सोशल मीडिया में बयान वेब पोर्टलों में न्यूज और फोटो साथ ही बेतरतीब ज्ञान लेकिन जमीन पर रहकर जमीनी स्तर पर किये जाने वाले किसी भी जायज मुद्दों पर इन नेताओं के कदम आगे नही आ पाया ।
आमजनता के नुमाइंदे बनते है। ये दलों के नेता पर जिम्मेदारी उठा रहे कई सामाजिक संगठन, युवा संगठन के सदस्य जहां कोई ऑक्सीजन की व्यवस्था की बात कर रहा तो कोई बेजुबान पशुओं को भोजन करा रहा वही आज एक समाज के द्वारा मानव सेवा की मिशाल पेश करते हुए 2000000 ( बीस लाख रुपये का दान ) आज एक निजी अस्पताल जो गरीब मजदूरों की सेवा व इलाज के लिए जाना जाता है। को दिया जो कि इन दोनों दलों के जिले के बड़े नेता कहलवाने वालो के लिए एक सीख माना जा सकता है।
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