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श्री गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा उनके पास रहने का सानिध्य मीले वे भी धन्य होते हैं :-संत रामबालकदास जी

5 नवम्बर पाटेश्वर धाम :-
हिंदू धर्म के पंच दिवसीय पर्व की महिमा का गुणगान करते हुए धार्मिक सत्संग का ऑनलाइन आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा उनकी विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप में आज भी किया गया जिसमें उन्होंने धनतेरस नरक चतुर्दशी दीपावली और आज गोवर्धन पर्व की महिमा का बखान किया भक्तों की जिज्ञासाओं को शांत करते हुए बाबा जी ने बताया कि समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के अनुसार धनतेरस के दिन ही भगवान धनवंतरी अमृत कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए थे। इसलिए उनके अवतरण दिवस के रूप में धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है और उनका पूजन होता है।
बाबा जी ने बताया कि नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध करके 16108 कन्याओं जो वेद पुराणों की रिचाये थी उनको मुक्त कर उन्हें यथा स्थान स्थापित किया और अपनी पत्नी का उन्हें अधिकार दिया दीपावली के महत्व को बताते बाबा जी ने बताया कि भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद आज ही के दिन अयोध्या लौटे थे, इस खुशी में अयोध्यावासियों ने दीये जलाकर उनका स्वागत किया था. … तब से दीपावली का पर्व भारत मे मनाया जाता है पाठक परदेसी जी ने जिज्ञासा रखी की गिरिराज गोवर्धन की महिमा पर प्रकाश डाले, बाबा जी
बाबा जी ने बताया कि श्री कृष्ण भगवान ने कहा है कि गोवर्धन पर्वत वे स्वयं ही है इसीलिए वृंदावन में जो गोवर्धन का मुखारविंद है उसे कृष्ण भगवान का मुखारविंद रूप माना जाता है, जिन्हें श्री गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा उनके पास रहने का सानिध्य मील वे भी धन्य होते हैं ऐसा श्रीमद्भागवत में प्रमाण मिलता है
श्री पुरुषोत्तम अग्रवाल जी ने विषय रखा कि गोवर्धन पर्वत धारणकर भगवान गिरिराज धरण ने क्या संदेश दिया कृपया प्रकाश डालेंगे बाबाजी, बाबा जी ने बताया कि यहां पर भगवान श्री कृष्ण ने हमें संदेश दिया है कि वन संपदा ही हमारा भरण पोषण करते हैं एवं वही हमें धारण करते हैं, यदि नदी है पर्वत है वन संपदा है तो ही हम है अगर ये नहीं है तो हमारा अस्तित्व ही नहीं
इस प्रकार दीपावली विशेष यह सत्संग प्रतिदिन की भांति 1 घंटे की आयोजन के साथ संपन्न हुआ
जय गौ माता जय गोपाल जय सियाराम

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