
बालोद – राष्ट्रीय विधिकसेवा प्राधिकरण एवं राष्ट्रीय महिला आयोग के संयुक्त तत्वाधान में एवं छ. ग. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशानुसार तथा जिला न्यायाधीश बालोद श्री. के o विनोद कुजूर अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के मार्गदर्शन में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद श्रीमती सुमन सिंह द्वारा दिनांक 11.11.2021 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यलय स्थित विवेकानंद सभाकक्ष बालोद में महिलाओं के अधिकार एवं महिलाओं से संबंधित विधियों पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया l
उक्त कार्यक्रम में आंगनबाडी कार्यकर्त्ता, महिला कमांडो, व मितानिनो की उपस्थिति रही l
उक्त कार्यक्रम में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रकाशित महिलाओं से संबंधित कानूनी जानकारी की पुस्तक का वितरण महिला प्रतिभागियों को किया गया तथा बच्चों से संबंधित एक नसीहत भरी कहानी ट्रैफिक नियम कानून,पहल नाबालिक
द अंडर-18 लघु फिल्मों तथा नालसा टीम का प्रदर्शन किया गया एवं श्रीमती सुमन सिंह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद,सुश्री कोनिका यादव प्रशिक्षु न्यायधीश बालोद श्रीमती संगीता बाला शर्मा अधिवक्ता, श्रीमती नर्मदा निषाद अधिवक्ता के द्वारा महिलाओं से संबंधित कानूनी जानकारी दी गई उक्त जागरूकता कार्यक्रम में श्रीमती सुमन सिंह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद द्वारा उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मितानिन एवं महिला कमांडो के कर्मचारियों को जानकारी देते हुए बताया कि शादीशुदा है या अविवाहित स्त्री अपने साथ हो रहे अन्याय व प्रताड़ना को घरेलू हिंसा के कानून के अंतर्गत दर्ज कराकर उसे घर में रहने का अधिकार पा सकती है जिसमें में रह रहे हैं यदि किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध उसके पैसे शेयर या बैंक के अकाउंट का इस्तेमाल किया जा रहा हो तो इस कानून का इस्तेमाल करके वह इसे रोक सकती है इस कानून के अंतर्गत घर का बटवारा कर महिला को उसी घर में रहने का अधिकार मिल जाता है और उसे प्रताड़ित करने वालों को उससे बात तक करने की इजाजत नहीं दी जाती विवाहित होने की स्थिति में अपने बच्चों की कस्टडी और मानसिक शारीरिक प्रताड़ना की मुआवजा मांगने का भी उसे अधिकार है घरेलू हिंसा में महिलाएं खुद पर हो रहे अत्याचार के लिए सीधे न्यायालय में गुहार लगा सकती है इसके लिए वकील को लेकर जाना जरूरी नहीं है अपनी समस्या के निदान के लिए पीड़ित महिला वकील प्रोटेक्शन ऑफिसर और सर्विस प्रोवाइडर में से किसी एक को साथ ले जा सकती है और चाहे तो खुद ही अपना पक्ष रख सकती है कि जानकारी दी गई तथा जो महिला घरेलू हिंसा की शिकार है और वह केस दर्ज कराना चाहती है वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद आकर अपनी समस्या का निराकरण करा सकते हैं की जानकारी दी गई सु श्री कोनिका यादव प्रशिक्षु न्यायाधीश द्वारा अपने उद्बोधन में बताया कि भारतीय दंड संहिता 498 के तहत किसी भी शादीशुदा महिला को दहेज के लिए प्रताड़ित करना कानूनी अपराध है अब दोसी को सजा के लिए कोर्ट में लाने या सजा पाने की अवधि बढ़ाकर आजीवन कारावास कर दी गई है हिंदू विवाह अधिनियम 1995 के तहत ने परिस्थितियों में कोई भी पत्नी अपने पति से तलाक ले सकती है पहली पत्नी होने के बावजूद पति द्वारा दूसरी शादी करने पर पति के 60 साल तक लापता होने पर प्रणय संबंधों में संतुष्ट ना कर पाने पर मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने पर धर्म परिवर्तन करने पर पति को गंभीर या लाइलाज बीमारी होने पर यदि पति ने पत्नी को त्याग दिया हो और उन्हें अलग रहते हुए 1 वर्ष से अधिक समय हो चुका हो तो यदि पति बच्चे की कस्टडी पाने के लिए कोर्ट में पत्नी से पहले याचिका दायर कर दे तभी महिला को बच्चे की कस्टडी प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार है तलाक के बाद महिला को गुजारा भत्ता स्त्रीधन और बच्चों की कस्टडी पाने का अधिकार भी होता है लेकिन इसका फैसला साक्ष्यों के आधार पर अदालत ही करती है पति की मृत्यु या तलाक होने की स्थिति में महिला अपने बच्चों की संरक्षक बनने का दावा कर सकती है इसके पश्चात महिलाओं के विरुद्ध अपराध महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकार, गिरफ्तार एवं बंदी महिलाओं के अधिकार बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 सेवा सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987के संबंध में विस्तार से कानूनी जानकारी दी गई
उक्त अवसर पर पैरा लीगल वॉलिंटियर्स श्री रमेश शर्मा श्रीमती लता रानी धीवर,कुमारी प्रमेश्वरी मेश्राम श्री अजय बंजारे श्री दीपक साहू श्री दिलीप तोपर्यं श्री कमलेश्वर साहू श्री बृजेश साहू कुमारी कल्पना उपस्थित रहे l
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