
घाटकछार पंचायत में 9 वर्षों में पूर्ण हुए सामुदायिक भवन निर्माण पर सवाल
पंचायत ने जंगल में बना दिया रंगमंच
एंकर- सरकार की ओर से ग्रामीण विकास के लिए लाखों रुपए का बजट तैयार कर ग्राम विकास हेतु जारी किया जाता है लेकिन ग्राम पंचायतों की अदूरदर्शिता और मनमानी के चलते ग्रामीण विकास के लिए जारी राशि का किस तरह से दुरुपयोग किया जाता है और वह आम जनता के लिए कैसे अनुपयोगी साबित हो जाता है इसका ताजा नमूना महासमुंद जिले के अंतिम छोर पर स्थित सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत घाटकछार में सामने आया है। जिले के सरायपाली जनपद क्षेत्र अंतर्गत आने वाले घाटकछार पंचायत में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए सांसद मद से वर्ष 2012-13 में 5 लाख की स्वीकृति दी गई । इस राशि से निर्माण कार्य ऐसे जगह पर किया गया जो गांव से महज 2 किलोमीटर दूर स्थित है जिसका ग्रामीणों की ओर से कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। गौरतलब है कि 2012-13 में राशि स्वीकृत होने के बाद भी उक्त भवन का निर्माण कार्य 2020 में पूरा हुआ जो कई सवालों को खड़ा करता है। दरअसल ग्रामीण विकास में इस तरह की लेटलतीफी और विलंब होने से विकास को लेकर कितनी उदासीनता दिखाई गई थी यह बात खुलकर सामने आ गई है। हम आपको बता दें कि जिस जगह पर सामुदायिक भवन का निर्माण किया गया है वह एक वीरान और जंगल इलाका है। इसी जगह पर लाखों रुपए की लागत से रंगमंच का भी निर्माण कराया गया है जबकि आसपास किसी तरह का कोई रिहायशी इलाका नहीं है। लिहाजा सामुदायिक भवन जहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और डेरा बन गया है तथा अय्याशी का अड्डा बनता जा रहा है वहीं दूसरी ओर रंगमंच की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायतों में विकास के लिए लाखों रुपए जारी होने के बाद भी ग्रामीणों को जब इसका लाभ नहीं मिल पाता है तब ग्रामीण विकास पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है।
महासमुंद से ब्यूरो चीफ जीत तिवारी की रिपोर्ट
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