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सरायपाली :- शासन की ओर से वर्ष 2024 तक प्रत्येक गांव में नल के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की योजना लाई गई है और इसके तहत ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था के लिए कार्य भी किए जा रहे हैं लेकिन अंतिम छोर पर स्थित ग्रामीण इलाकों में पेयजल के लिए कितने मारामारी करनी पड़ रही है इसका नजारा महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लाक में आने वाले सबसे अंतिम बिंदु पर स्थित ग्राम भगत सरायपाली में सामने आया है। यहां के निवासी पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं लेकिन न तो पंचायत की ओर से पानी की व्यवस्था की जा रही है और ना ही लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर है। ऐसे में सरकारी विकास के दावों की जहां पोल खोल रही है वहीं दूसरी ओर तमाम विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। दर्शन लंबे अरसे से ग्राम पंचायत भगत सरायपाली में पानी की समस्या सामने आ रही थी लिहाजा जब इस गांव में पहुंच कर ग्रामीणों से बात की गई और गांव के रिपोर्टिंग की गई तब कई चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। पिछले 2 साल से गांव में गलियों में लगे नल बंद पड़े हैं और लोगों को पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है लेकिन हर वर्ष पेयजल व्यवस्था और पाइप लाइन विस्तार सहित नल मरम्मत के नाम पर पंचायत की ओर से लाखों रुपए खर्च किए जाने के बाद भी लोगों को एक बूंद पानी नल के माध्यम से नसीब नहीं हो रहा है। ऐसे में पंचायत के माध्यम से 15 वा वित्त योजना से खर्च की गई राशि कहां जा रही है यह जांच का विषय बन गया है। ग्रामीणों से जब चर्चा की गई तब उनका साफ तौर पर कहा था कि पुणे के लिए पिछले 2 साल से वह मशक्कत कर रहे हैं लेकिन पंचायत के प्रतिनिधि नहीं सुन रहे हैं। पेयजल व्यवस्था को लेकर जब ग्राम पंचायत भगत सरायपाली के सचिव चंद्र कुमार साहू से चर्चा करने का प्रयास किया गया तब वह पंचायत भवन में ताला जड़कर गांव से ही नदारद हो गए। भरौल ग्रामीणों ने तत्काल पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

रिपोर्ट जीत तिवारी महासमुन्द
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