
Cg24 आज तक बोधन भट्ट बालोद
बालोद जिले में वैसे तो कई पर्यटन स्थल है व देवी देवताओं के मंदिर भी है एक मंदिर ऐसा है जहां देवी देवताओं के साथ स्वामी भक्त कुत्ते के भी पूजा होती है जिसका नाम इतिहास के पन्नों पर भी अंकित है
बालोद से डौंडीलोहारा मार्ग पर जिला मुख्यालय बालोद से महज 8 किलोमीटर दूर ग्राम माली घोरी खपरी में कुकुर देव के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर जहां नवरात्रि ,महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान के साथ कुत्ते की समाधि की पूजा की जाती है
वास्तव में यह एक स्मृति स्मारक है जो भगवान शिव को समर्पित है मंदिर के गर्भ गृह में जलधारी योनिपीट शिवलिंग स्थापित है मंदिर का बाहरी भाग में नागो का अंकन है यह पूर्व मुखी मंदिर है इस मंदिर का निर्माण फनी नागवंशी शासकों द्वारा 14-15 शताब्दी ईस्वी के मध्य कराया गया था मंदिर निर्माण के संबंध में कुछ रोचक किवदंती प्रचलित है यह मंदिर साहूकार कर्ज देने वाले बंजारा के द्वारा उसके स्वामी भक्त कुत्ते की स्मृति कुत्ते की दफन स्थल पर बनाया गया है ।ग्राम खपरी के शिव भजन साहू , संतोष साहू, लोकनाथ निषाद, नेत राम कुंभकार , ईश्वर साहू, पवन देवांगन,
सरपंच गोपाल देवांगन, ग्राम पटेल किसनू राम पटेल आदि लोगों ने बताया कि बहुत साल पहले यहां बंजारों की बस्ती
रहा करती था एक बार जब घोर अकाल पड़ा तो एक बंजारा अपने स्वामी भक्त कुत्ते को साहूकार के पास गिरवी रखकर उनसे कुछ पैसे उधार लेकर कमाने खाने चला गया कुछ रोज बाद चोरों ने साहू कार के घर चोरी की और उस धन को थोड़ी दूर पर जाकर तलाब में
छुपा दिया जिसको वह स्वामी भक्त कुत्ता देख रहा था सुबह होने पर उन्होंने साहू कार को उस जगह ले जाकर पानी में तैर कर इशारा से बार बार भोकता था तो दरोगा ने पानी में जा कर देखा जहां पर उनके चोरी की हुई धन पोटली में वापस मिल गई जिससे साहू क़ार प्रसन्न होकर उन्होंने कुत्ते के गले में एक चिट्ठी बांधकर उसे आजाद कर दिया कि मैं तुम्हारे स्वामी भक्त से बहुत प्रसन्ना हूं आज मैं तुझे आजाद करता हूं और तुम्हारे मालिक द्वारा ली गई कर्जे को भी माफ करता हूं कुत्ता खुशी से भागते हुए अपने पुराने मालिक के पास गया कुत्ते को इस तरह वापस आते देख कर उसके मालिक ने बिना सोचे समझे उस पर डंडे से प्रहार कर दिया जिससे वहीं पर कुत्ते ने प्राण त्याग दिए थोड़ी देर बाद उसकी नजर उस चिट्ठी पर गई जिसको पढ़ कर वह बहुत दुखी हुआ और अफसोस करने लगा मालीगोदी ( उसका पुराना मालिक ) उसकी याद में वहीं पर उसकी समाधि बनाई और स्वामी भक्त कुत्ते को इतिहास में अमर कर दिया मालीगोदी अब माली घोरी के नाम से जाना जाता है जिसकी लोग आज भी वफादारी के नाम से पूजा करते हैं मंदिर के गर्भगृह में योनि पिट है जहा पर लोग सावन व महाशिवरात्रि पर्व में जल चढ़ाकर पूजा अर्चना करते हैं इस मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा भी है जो जमीन से निकली हुई है जो दिन प्रतिदिन बढ़ रही है किसी व्यक्ति को कुकुर खांसी, वा कुत्ता काट ले तो इस मंदिर में आकर नारियल अगरबत्ती जलाकर यहां की मिट्टी को लेे जाकर उस कांटे हुए जगह पर लेप बना कर लगाने पर भी आराम भी मिलता है ऐसी मान्यता है।
पुरातत्व विभाग की उदासीनता
पुरातत्व विभाग मंदिर को अपने संरक्षण में लेकर भूल गई है विकास के नाम पर अब तक कोई भी कार्य नहीं हुए हैं ग्रामीण व आसपास के दानदाताओं के सहयोग से पेयजल व भवन के निर्माण की गई है
ग्रामीणों का कहना है कि ऐतिहासिक पुरातत्व होने पर इस मंदिर को पुरातत्व विभाग रायपुर अपने संरक्षण मे तो लेे ली है और देखरेख के लिए एक चौकीदार की नियुक्ति की गई है पर इस मंदिर में पुजारी की कमी है व आसपास दूरदराज से आए दर्शनार्थियों के लिए ठीक से बैठने की व्यवस्था नहीं है छोटे-छोटे बच्चों के लिए गार्डन , झूले की व्यवस्था होनी चाहिए


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